कामिनी की कामुक गाथा (भाग 7)

आप लोगों ने पढ़ा कि जमशेदपुर से रांची तक अपने तीन रिश्तेदार बुजुर्गों के साथ सफर के दौरान यात्रियों से भरी बस में उनके नाक के नीचे किस तरह मेरे तीनों बुजुर्ग और दो अजनबी बूढ़ों ने अपने अपने अंदाज में मनमाने ढंग से मेरी जवानी का रसपान किया और अपनी अपनी हवस मिटाई। खास करके सरदारजी की वह अचंभित करने वाली यादगार चुदाई और उस गन्दे कंडक्टर की बदबूदार बदन से भी पिसती हुई मैं ने चुदाई का एक अलग ही लुत्फ उठाया, उसे भला मैं कैसे भूल सकती हूं। तीन घंटों में मैं कुल सात बार स्खलित हुई। ओह अद्भुत था वह सफर। पूरी रंडी बना दी गई थी। कुल मिलाकर यह सफर मेरे लिए बेहद रोमांचक और यादगार साबित हुआ।

नुची चुदी थकी मांदी थरथराते कदमों से उन तीनों बूढ़ों के साथ नानाजी के कार तक पहुंची, जिसे नानाजी ने फोन कर के बुलाया था, फिर कार से नामकुम स्थित नानाजी के फार्म-हाउस जैसे घर पहुंचे। उनका घर घनी आबादी से करीब आधा किलोमीटर की दूरी पर ताकरीबन दो एकड़ जमीन पर फैली सात फुट ऊंची दीवारों से घिरी और बाउंड्री वॉल से करीब दस फीट अंदर चारों ओर ऊंचे ऊंचे ताड़ और खजूर के पेड़ थे। दो तल्ला मकान करीब तीन हजार वर्ग फीट में फैला हुआ था। मकान के बाईं ओर कार का पोर्टिको था और पीछे की ओर तीन कमरों का एक मकान था जिसमें उनका घरेलू नौकर और ड्राईवर रहते थे।

बस से उतरने से लेकर नानाजी के घर पहुंचने तक तीनों बूढ़े मुझसे नज़रें चुराते रहे और उनके जुबान पर ताले पड़े रहे, यह उनका अपराध बोध था कि उनकी कामुकता मुझ पर भारी पड़ गई और वे चाहकर भी कुछ करने में असमर्थ थे। उनके सामने ही दो अजनबियों ने ं रंडियों की तरह मुझे रौंद डाला। मैं भी मजबूरन सरदारजी की ब्लैकमेलिंग की शिकार हुई वरना इस प्रकार के लोगों से निपटना मुझे अच्छी तरह से आता है। खैर जो हुआ सो हुआ, मुझे अब कोई मलाल नहीं था, आखिर मजबूरी में ही सही, मुझे दो और नये लौड़ों का स्वाद चखने का अवसर और ऐसी रोमांचक परिस्थिति में चुदाई से नये प्रकार के आनंद का अनुभव तो मिला।

“आईए मालिक, अंदर आईए” एक करीब 55 साल का मजबूत कद काठी का, करीब 5′ 11,” लंबा बुजुर्ग, आधा गंजा, बेतरतीब दाढ़ी, सांवला रंग, जो शायद वहां का नौकर था, कहते हुए बड़े से ड्राइंग रूम में ले आया, पीछे-पीछे नानाजी का ड्राइवर हमारा सामान ले आया और ड्राईंग रूम से सटे एक कमरे की ओर बढ़ते हुए मुझसे कहा, “आ जाओ बिटिया, आओ मैं तुम्हारे रहने का कमरा दिखाता हूं।”

इतनी देर के बाद नानाजी के मुंह से आवाज निकली, “नहीं करीम मियां, इस कमरे में नहीं, वो जो बड़ा वाला कमरा ऊपर में है, उसमें बिटिया को ठहरने की व्यवस्था करो, यह कमरा इनके (दादाजी और बड़े दादाजी) लिए है। हम सब फ्रेश हो जाते हैं फिर खाने के लिए डाइनिंग हॉल में आएंगे।”

“ठीक है मालिक आप लोग डाइनिंग हॉल में आएंगे तो मैं खाना लगा दूंगा” नौकर जिसका नाम हरी था, बोला।

फिर हम फ्रेश होने अपने अपने कमरों में चले गए। मैं ने बाथरूम में जाकर अच्छी तरह से ऊंगली डाल डाल कर अपनी चूत और गांड़ की सफाई की, जिन्हें चोद चोद कर इन बूढ़ों ने बुरा हाल कर दिया था। फिर मैं डाइनिंग हॉल में आई तो देखा कि अभी तक बड़े दादाजी और दादाजी के मुंह लटके हुए थे।

मैं माहौल हल्का करने के लिए बोली, “आप लोग अभी तक मुह लटकाए हुए क्यों हैं? अरे जो होना था हो चुका, आप लोग क्या कर सकते थे। मुझे देखो, मुझे इस बात का कोई खास अफसोस नहीं है तो फिर आप लोग इतने दुखी क्यों हैं। अब केवल इसकी चिंता कीजिए कि सरदारजी के मोबाइल से वह वीडियो कैसे डिलीट किया जाय। वैसे इसका समाधान भी मेरे पास है। अब आप लोग परेशान मत होइए।” मैं ने उन्हें तसल्ली दी।

“क्या करोगी तुम” प्रश्नवाचक निगाहों से मुझे देखने लगे।

“मैं ने सोच लिया है मुझे क्या करना है, आपलोग चिंता मत कीजिए”, कहती हुई मैं ने उन्हें आश्वस्त किया। मैं ने सोच लिया था कि अगर सीधी उंगली से घी नहीं निकला तो उंगली टेढ़ी कर के निकाल लूंगी।

अब वहां का बोझिल माहौल थोड़ा हल्का हुआ। नानाजी ने खाते खाते कहा था कि शाम को बाजार घूमने चलेंगे। फिर हम आराम करने अपने कमरों में चले गए। थकी हुई तो थी ही, शाम 5 बजे तक मैं घोड़े बेच कर सोती रही। शाम को जब मैं उठी तो देखा वे लोग ड्राइंग रूम में तैयार बैठे थे बाजार जाने के लिए।

“मैं घर में ही रहूंगी, आराम करना चाहती हूं, आप लोग बाजार घूम आइए।” मैं ने कहा। उन्होंने भी जोर नहीं दिया, “ठीक है बिटिया तुम आराम करो”, कह कर वे कार में ही निकल पड़े। इधर मैं घर में और घर के चारों ओर घूम रही थी, साथ में नानाजी का नौकर हरी था जो पूरे घर और बाहर के बारे में मेरी जिज्ञासा को शांत करता जा रहा था। बाहर घर के सामने और दाईं ओर फूल पौधों का बगीचा था। घर के अंदर सब कुछ व्यवस्थित ढंग से सजा हुआ था। ड्राइंग रूम में ठीक सामने की दीवार पर एक खूबसूरत उम्रदार स्त्री का फोटो एक सुंदर फ्रेम में मढ़ा टंगा था।

“यह कौन है?” मैं ने हरी चाचा से पूछा।

“बिटिया ई तुम्हरा नानी का फोटो है। दस साल पहिले इनका देहान्त हो गया था।” उन्होंने मुझे बताया। एक तरफ दीवार पर 48″ का एल ई डी टी वी लगा हुआ था। मैं ने एक कमरे में किताबों का बड़ा सा शेल्फ देखा, जिसमेें ढेर सारी पुस्तकें सजी थीं। शेल्फ के नीचे तीन ड्रावर थे जिनमें किताबों के अलावा कुछ डी वी डी थे। ड्रावर में अचानक मेरी नज़र एक बड़े अल्बम पर पड़ी जिसके कवर पर पूर्णतः नग्न युवती की तस्वीर थी। मैं उस अल्बम को निकाल कर ज्यों ही पन्ने पलटने लगी, अंदर की तस्वीरों को देखकर दंग रह गई। पूर्णतय: नग्न युवक युवतियों की विभिन्न उत्तेजक मुद्राओं में संभोगरत तस्वीरें भरी पड़ी थीं। कहीं कहीं तो एक अकेली युवती के तीन चार पुरुषों के साथ सामुहिक संभोग में लिप्त तस्वीरें भी थीं। देख कर तो मैं गनगना उठी, सारे शरीर में चींटियां दौड़ने लगी।

“अरे ई सब मत देख बिटिया” कहते हुए नौकर हरी ने झट से अल्बम मेरे हाथ से छीन कर ड्रावर में रख दिया, अल्बम छीनने के क्रम में उस अल्बम से बिना लेबल वाले कुछ डीवीडी नीचे गिर पड़े थे जिन्हें उठाकर उसी ड्रावर में रख दिया था फिर किचन में चला गया था। उनमें से एक डीवीडी बाहर ही छूट गया था जिसे मैं ने जिज्ञासावश उठाकर टीवी से लगे डीवीडी प्लेयर में चला दिया। यह एक अंग्रेजी फिल्म थी। एक सोफे पर दो अधेड़ हट्ठे कट्ठे मर्द बैठे दारू पी रहे थे। इतने में कमरे में एक 18 – 19 साल की खूबसूरत सेक्सी लड़की मिनी स्कर्ट और छोटी सी बिना बांह के लो कट ब्लाउज में आई और उन मर्दों के बीच बैठ गई। फिर उन मर्दों ने उस लड़की के साथ चुम्मा चाटी शुरू कर दिया और देखते ही देखते सभी निर्वस्त्र हो गये । ऐसा लग रहा था मानो दो दानवों के बीच एक कमसिन गुड़िया फंसी हो। फिर उनके बीच बेहद उत्तेजक कामक्रीड़ा की शुरुआत हुई जिसे देख मैं भौंचक रह गई, जिस तरह की तस्वीरें अल्बम में थीं उसी तरह की फिल्म टीवी स्क्रीन पर चल रही थी। बेहद उत्तेजक अंदाज में वासना का नंगा खेल चल रहा था। मैं समझ गई “अच्छा तो इसका मतलब नानाजी ऐसी फिल्में देख देख कर इतने कामुक हो गये हैं।”

फिल्म में अब एक अठारह उन्नीस साल की युवती को दो अधेड़ हट्ठे कट्ठे मर्द एक साथ भोग रहे थे और वह युवती मस्ती के आलम में डूूूबी सिसकारियां भर रही थी। यह देख कर मैं भी उत्तेजित हो उठी, मेरी चूत में पानी आ गया और अनायास ही मेरा हाथ मेरी पैंटी के ऊपर से ही चूत को सहलाने लगा। मैं भूल गयी कि इस वक्त मैं ड्राईंग रूम में हूं। मेरी आंखें अधमुंदी हो गयीं, एक हाथ से चूत के ऊपर फेर रही थी और दूसरे हाथ से मैं खुद ही अपनी चूची मसलने लगी थी। “ओह यस फक मी, फक मी हार्ड, आह डियर, ओह ओह, यस्स्स डीयर फकर्स,, फिल माई होल्स विद योर लवली कॉक्स, मेक मी योर बिच, आह यस्स्स ओ्ओ्ओ्ओह” एक रंडी की तरह उस युवती की कामुकता भरी आवाज आ रही थी, वे अधेड़ हट्ठे कट्ठे मर्द उस लड़की के चूत और गांड़ में अपने गधे सरीखे लंड डाल कर कुत्तों की तरह धकमपेल करते हुए बोले जा रहे थे, “ओह डियर, आह आवर बिच, टेक आवर कॉक, टेक इट डीप इन योर कंट, आह फकिंग बिच, आह आह आह आह” और इधर मैं अपनी पैंटी को नीचे सरका कर अपनी चूत में उंगली डाल कर अंदर-बाहर करती हुई अपनी चूचियों को मसले जा रही थी।

मेरे मुंह से भी वासनात्मक सिसकारियां निकलने लगीं थीं, ” आह ओह इस्स्स, उफ्फ” और तभी मैं ने दो मजबूत हाथों को अपनी चूचियों पर महसूस किया, चौंककर आंखें खोली तो देखा नौकर हरी सोफे के पीछे से मेरी चूचियों पर हाथ फेर रहा था। न जाने कब से वह यह नजारा देख रहा था और जब उत्तेजना से उसके सब्र का पैमाना छलक उठा तो बेकाबू हो कर यह हरकत कर बैठा। यह सब इतना आकस्मिक हुआ कि मैं घबरा गई और हड़बड़ा कर खड़ी हो गई। मेरी घबराहट देख कर वह झट से अपना हाथ हटा लिया और शर्मिंदा होता हुआ बोला, “माफ करना बिटिया, बहुत देर से तुम्हें इस हाल में देख रहा था और बर्दाश्त नहीं हुआ तो ऐसा कर बैठा।”

मैं पल भर अकचकाई खड़ी रही फिर स्थिति को संभाला, आखिर मैं भी तो कामोत्तेजना की ज्वाला में जल रही थी, “ओह कोई बात नहीं चाचा, मैं समझ सकती हूं। आपने तो वही किया जो इस स्थिति में कोई भी मर्द करता है।” मेरे कथन में मूक आमंत्रण भी था। मेरी आंखों में वासना की भूख स्पष्ट परिलक्षित हो रही थी जिसे उसकी अनुभवी आंखों ने पढ़ लिया था।

“इसका मतलब तुम्हें बुरा नहीं लगा ना?” उसने भी आशा भरी वासनापूर्ण आवाज में कहा।

“ओह नहीं चाचा, मुझे बिल्कुल बुरा बिल्कुल नहीं लगा” मैं तुरंत बोल उठी। मैं तो चाहती ही थी कि उनकी झिझक हट जाए और किसी तरह मेरे अंदर भड़क उठी वासना की ज्वाला को शांत कर दे।

“फिर तो ठीक है बिटिया, हम तोहरे संग कुछ और भी करना चाहते हैं, अगर तुम राजी हो तो।” वे बड़ी बेसब्री से बोले।

“ठीक है चाचा ठीक है, अब आपको जो भी करना है कर लीजिए।” मैं ने वासना की ज्वाला में धधकती कामुकतापूर्ण लहजे में अपने आप को एक तरह से उसके सामने परोस दिया।

इतना सुनना था कि वह घूम कर सोफे के सामने आ गये और मुझे अपनी मजबूत बांहों में भरकर मेरे चेहरे पर चुंबनों की झड़ी लगा दी। उनकी बेतरतीब दाढ़ी मेरे चेहरे पर चुभ रही थी मगर मुझे यह सब बेहद अच्छा लग रहा था। मेरे मुंह में अपना लंबा मोटा जीभ डाल दिया और कुत्ते की तरह मुंह के अंदर घुमाने लगा। मैं मस्ती में डूबती चली जा रही थी। मैं अपनी चूत के आस पास उनके कठोर लंड की दस्तक महसूस कर रही थी।

उधर टीवी स्क्रीन पर वासना का नंगा नाच चल रहा था और इधर आहिस्ता आहिस्ता वह मेरे ब्लाउज के बटन खोलने लगा। फिर ज्यों ही उसे अहसास हुआ कि मैं ने अंदर ब्रा नहीं पहनी है तो वह और बेसब्र हो कर आनन फानन में मुझे ब्लाउज से मुक्त कर दिया और आंखें फाड़कर मेरी नंगी चूचियों को ऐसे देखने लगा जैसे किसी भूखे कुत्ते के सामने स्वादिष्ट मांस का टुकड़ा पड़ा हो। उसने बड़ी बेताबी से मेरी चूचियों को मसलना चूसना चालू किया। अधखिली चूचकों को बारी बारी से मुंह में ले कर चूसने लगा, चुभलाने लगा।

मैं पागलों की तरह “आह, आह, इस्स्स इस्स्स” करने लगी। इस दौरान उन्होंने मुझे स्कर्ट और पैंटी से भी मुक्ति दे दी थी। अब उनका ध्यान मेरी पनियायी बुर पर गया। देखते ही देखते वह मेरी चूत पर टूट पड़ा और कुत्ते की तरह चाटना शुरू कर दिया। पहले ऊपर ऊपर जीभ फिराने लगा फिर चूत के अंदर अपनी जीभ घुसा घुसा कर चाटने लगा, एकदम नानाजी की तरह।

मैं कामुकता में भर कर अपनी कमर आगे पीछे करने लगी “आह चाचा, ओह चाचा, चाट चाट आ्आ्आह ओ्ओ्ओ्ओह इस्स्स आह मैं गई चाचा” कहते हुए आनंदातिरेक में डूबी मुख मैथुन का अभूतपूर्व सुख प्राप्त करती रही। मैं उत्तेजना के सैलाब में डूबती उतराती थरथरा उठी और मेरा स्खलन होने लगा। “आ्आ्आह ओ्ओ्ओ्ओह मैं मरी चाचा” मगर चाचा पर तो भूत सवार हो चुका था, और जोर जोर से चाटने चूसने लगा। मैं दुबारा उत्तेजना में भर कर छटपटाने लगी।

चाचाजी ने देखा लोहा गरम है, झटके से अपना कुरता पैजामा खोल फेंका और मादरजात नंगा हो गया। काला कसरती बदन हाथों में, छाती से लेकर नीचे पैरों तक और पूरे पीठ पर बालों से भरा, भयावह शरीर, किसी आदी मानव की याद दिला रहा था। उनका लंड तो बाप रे बाप, ऐसा लंड मैं पहली बार देख रही थी। लंबा 9″ का था सरदार जी की तरह, मोटा करीब चार इंच का रहा होगा। सामने का गुलाबी सुपाड़ा लंड की कुल मोटाई से थोड़ा और बड़ा करीब साढ़े चार इंच गोल, किसी गदा की तरह, मुझे रहीम टैक्सी ड्राइवर का स्मरण करा रहा था, सुपाड़ा सामने से नुकीला, उस पर तुर्रा यह कि बीच से हल्का टेढ़ा ऊपर की ओर उठा हुआ, वक्र। उनके बड़े बड़े अंडकोष थैली की तरह नीचे झूल रहे थे। मैं घबराकर कर बोली, “हाय राम यह क्या है” । मैं सचमुच उनके लंड की मुटाई और आकार प्रकार से घबरा गई थी। घबराहट के साथ साथ मेरी यह कोशिश भी थी कि मैं उन्हें यह जाहिर न होने दूं कि मैं अबतक छः छः मर्दों से चुद कर छिनाल बन चुकी हूं।

“ई हमरा लौड़ा है बिटिया” आपने गैंडे जैसे शरीर के सामने दोनों जांघों के बीच काले नाग की तरह फन उठाए फुंफकार मारता हुआ वीभत्स लंड हिलाता हुआ बड़ी ही अश्लीलता से बोला। “अब हम ई लौड़ा के तोहार बुर में डाल के चोदब बिटिया रानी”।

“नहीं चाचा जी नहीं, यह मेरी चूत में कैसे घुसेगा, मेरी चूत फट जाएगी। हाय नहीं मैं मर जाऊंगी चाचा जी।” उनका गैंडा जैसा मादरजात नंगा शरीर और विस्मयकारी भयावह लंड के दर्शन मात्र से मैं थर्रा उठी और घबरा कर बोली।

“तुमको हम कुछो न होने देंगे बिटिया। सब कुछ आराम से होगा। तू घूम कर सोफा के पकड़ ले, हम पीछे से तोहार बुर में लौड़ा पेलेंगे। बहुत मजा देंगे बिटिया।” कहते हुए मुझे घुमा कर झुका दिया। अब ऊखल में सिर दिया है तो मूसल से क्या डरना, सोचते हुए मैं ने यंत्रचालित गुड़िया की तरह सोफे पर हाथ रख कर अपने शरीर का भार दिया और धड़कते दिल से स्थिर हो कर दांत भींचे अपनी चूत पर होने वाले आक्रमण के लिए तैयार हो गई। चाचाजी ने पीछे से आकर मेरी कमर किसी कुत्ते की तरह पकड़ कर अपने लंड के सुपाड़े को मेरी चूत के मुहाने पर रख कर रगड़ना शुरू किया तो मैं गनगना उठी। कुछ ही पलों में मैं पगली हो गई और बेसाख्ता बोल उठी, “अब डाल भी दो चाचा जी”।

इस खुले आमंत्रण को भला वासना की गर्मी से तपते चाचा जी कैसे नकार सकते थे, वे तो चाहते ही थे कि मैं खुद अपने मुंह से निमंत्रण दूं और वो मुझे भंभोड़ डालें। उन्होंने मेरे चूत के छेद पर लंड का सुपाड़ा टिकाया, अपने बनमानुषि सख्त हाथों से मेरी कमर को कस कर पकड़ा और एक करारा धक्का मारा, “ले मेरी बिटिया रानी, आह हूं।”

“आह मर गई रे चाचा” मैं दर्द के मारे चीख पड़ी। “हाय मां मेरी चूत फटी रे फटी।” मैं छटपटाने लगी।

मगर चाचाजी के लौड़े को तो मानो स्वर्ग का द्वार मिल चुका था, मेरी चीख सुनकर वहशी जानवर की गुर्रा उठे, “चुप साली कुतिया, तुम्हरा बुर देख कर ही हम समझ गए हैं कि तू शरीर से कोमल लौंडिया दिखने वाली एक खेली खाई रंडी है। अब चुपचाप हमें अपना बुर चोदने दे बुर चोदी, बहुत दिनों बाद तोहरे जैसी लौंडिया मिली है चोदने को।” उनकी गुर्राहट सुन कर मेरी रूह फना हो गई।

“तो इसका मतलब अपने आप को मासूम दिखाने की मेरी सारी कोशिशों पर पानी फिर गया था। मैं भी कितनी बेवकूफ थी, कैसे भूल गयी थी कि पिछले चार पांच दिन में ही छ: अलग-अलग मर्दों से चुद चुद कर फूली हुई मेरी चूत चुगली कर जाएगी” मैं हक्की-बक्की रह गई। आरंभिक भीषण प्रहार की तीक्ष्ण वेदना से बेहाल, जबतक मैं अपने होश संभालती, अबतक वहशी जंगली जानवर बन चुके चाचा जी ने आधे घुसे अपने लंड को थोड़ा बाहर निकाल कर मेरी कमर को बनमानुष की तरह कस के पकड़ा और एक हौलनाक वार से पूरा का पुरा लौड़ा भच्च से जड़ तक भोंक दिया। मेरी चूत के मुंह से उनके लंड का नुकीला और विशाल सुपाड़ा बड़ी बेरहमी से प्रवेश करके फैलाता हुआ मेरे गर्भाशय में दस्तक दे दिया। उनके लंड का टेढ़ापन भी मेरे बच्चेदानी तक के मार्ग को अनुकूल और सुगम बनाने में अपना योगदान दे रहा था।

“आह मार डाला रे, आह्ह्ह्, ओह्ह्ह।” किसी बेरहम कसाई से हलाल होती मेमने की तरह मेरी दर्दनाक चीख से पूरा घर गूंज उठा। गनीमत थी कि घर में हमारे सिवा और कोई नहीं था वरना गजब हो जाता। किला फतह कर लेने के बाद करीब एक मिनट तक चाचा जी बिना हिले डुले रुके रहे, किसी अनुभवी शिकारी की तरह, क्योंकि उन्हें अच्छी तरह से पता था कि उनके लंड की पहली चुदाई किसी भी अच्छी खासी रंडी का दिल दहला सकती है।

“चो्ओ्ओ्ओप्प्प्प हर्र्र्र्र्रामजादी, चिल्ला मत कुतिया।” उनके मुख से बड़े ही वहशी अंदाज में गुर्राहट निकली। मैं ने महसूस किया कि दर्दनाक प्रथम प्रहार के पश्चात एक मिनट के विराम से मुझे काफी आराम मिलने लगा था। मेरा चीखना चिल्लाना और छटपटाना धीरे धीरे कम हो कर शांत हो गया। चाचाजी अब धीरे धीरे लंड को छोटे छोटे झटके दे दे कर अंदर-बाहर करने लगे। उनके लंड के चारों ओर मेरी चूत की दीवारें रबर की तरह फ़ैल कर विशाल लंड से चिपकी हुई उसके अंदर बाहर होने से पैदा होने वाले घर्षण से मुझे अलग ही आनंद से अवगत कराने लगी। कुछ पलों में ही मैं उनके अजीबो-गरीब लंड से चुदने में मेरी चूत पूर्णतः तैयार और सक्षम हो गई थी। मुझमें अजीब सी मस्ती छाने लगी थी। “आह, ओह, मां, इस्स्स,” मेरे मुंह से निकलती सिसकारियां चाचा जी को बता रही थीं कि अब यह लौंडिया चुदने को बेताब है और जैसे मर्जी वैसे अपनी हवस मिटा सकते हैं।

चाचाजी इसी पल का तो इंतजार कर रहे थे। उनके चोदने की रफ़्तार धीरे धीरे बढ़ने लगी। छोटे छोटे धक्कों की जगह अब लंबे लंबे धक्कों ने ले लिया। मैं मस्ती के आलम में खोती चली गयी। चाचाजी के लौड़े से चुदने का वह अभूतपूर्व आनंद मुझे सचमुच पागल करता जा रहा था। “आह, ओह राजा, हाय चाचा जी, ओह मां, चोद डालो मेरी चूत, आह मजा आ रहा है राजा आह ओह मेरे जान,” मैं बोली जा रही थी। उधर चाचा जी मेरी कमर पकड़ कर धक्का पर धक्का किसी कुत्ते की तरह मारे जा रहे थे और वे पूरे वहशी दरिंदे की तरह जोर जोर से बोले जा रहे थे, “हरामजादी कुतिया अबतक नखरे कर रही थी, बुर चोदी तेरी मां की चूत रंडी, छिनाल, चूतमरानी साली कुकुरचोदी, तेरे बाप की गांड़ मारुं, तेरी मां का भोसड़ा चोदूं, ले हमार लौड़ा हुम्म्म हुम्म, हं हं हं।”

” हां राजा, मैं तेरी बुर चोदी, मैं तेरी चूत मरानी, मैं तेरी रंडी, मैं तेरी कुत्ती, आह, चोद मादरचोद, चोद लौड़े के, मेरे बुर के चुदक्कड़ कुत्ते, कमीने, हरामी, अपनी मां के लौड़े, मुझे आज रंडी बना दे, अपनी कुतिया बना ले,” और न जाने कितनी बेहयाई का इजहार करती वासना के बहाव में बही जा रही थी। मैं ने शराफत का नकाब उतार फेंका और पूरी रंडी की तरह चुदाई का आनन्द लेने लगी।

15 मिनट बाद मैं अनिर्वचनीय आनंद से सराबोर झड़ने लगी, “हाय रे हरामी, मैं झड़ रही हूं रे मां, ओह चोदू न रा्आ्आ्आआ्ज्ज्जआ, इस्स्स” करती हुई छरछरा कर खल्लास हो गई। मगर चाचा जी तो पागलों की तरह मेरी चूचियों को मसलते हुए यंत्रवत किसी कुत्ते की तरह दनादन चोदने में मशगूल थे। चोदने की रफ़्तार बिल्कुल किसी कुत्ते की तरह ही थी। दो तीन मिनट में मैं फिर उत्तेजना के मारे वासना की आग में झुलसने लगी और फिर उस कामुक दरिंदे की वहशियाना हरकतों में डूब कर मदहोश हो गई। उधर टीवी स्क्रीन पर वासना का नंगा नाच और इधर सोफे पर हम दोनों के शरीर, एक दूसरे में समा कर एकाकार होने की जद्दोजहद में कामुकता की पराकाष्ठा को पार करता हुआ बेहद उत्तेजक और अश्लीलतापूर्ण, आपस में गुत्थमगुत्थी और धींगामुश्ती का खेल करीब आधे घंटे तक चलता रहा।

फिर चाचाजी ने तूफानी रफ्तार से चोदते हुए मेरी कमर को कस कर पकड़ लिया और यकायक स्थिर हो गये, इसी समय उनके लंड का गरमागरम वीर्य लावा की तरह फचाफच मेरे गर्भाशय को सींचने लगा और मैं भी उसी समय स्खलित होने लगी। ओह कितना सुख, आनंद की पराकाष्ठा, “हाय मैं गई्ई्ई्ई रज्ज्ज आआ्आ्आह” चाचा जी भी “आआ्आ्आह” करते हुए करीब एक मिनट तक अपना वीर्य मेरी कोख में उंडेलते रहे। उधर टीवी स्क्रीन पर भी दोनों मर्द लड़की की चूत और गांड़ से निकाल कर अपने अपने लंड का वीर्य उस लड़की के चेहरे पर, चूचियों पर और पेट पर फचफचा कर गिराने लगे। उधर वो खल्लास हुए और इधर हम भी स्खलित, निढाल हो गये थे।

चाचाजी तो किसी भैंस की तरह डकारते हुए नंगधड़ंग वहीं फर्श की दूरी पर लुढ़क गये। वे इतने सालों बाद मुझ जैसी लौंडिया को चोद कर निहाल हो गये थे, उनके मुख पर पूर्ण संतुष्टि की मुस्कान थी। मैं भी थकी मांदी उन्हीं के गैंडे जैसे शरीर से चिपक कर पूरी छिनाल की तरह नंगी ही टांग पर टांग चढ़ा कर लेटी रही। उनके आनंददायक चुदाई से तृप्त मैं पगली उनके बेतरतीब दढ़ियल चेहरे पर बेहताशा चुम्बनों की बौछार कर बैठी।

चाचाजी मुस्कुरा कर मुझे अपनी बाहों में कस कर भींचे पूछ बैठे, “ई बताओ बिटिया तुझे इसके पहले किसने चोदा है? सच बताना, शरमाओ मत। हम कौनो को नहीं बताएंगे।”

मैं थोड़ी झिझकी, फिर बोली, “सच बताऊं? बुरा तो नहीं मानेंगे ना?”

“अरे काहे का बुरा मानना। औरत मरद में तो ई सब होते ही रहता है। मगर तुम तो इतना कम उमर में पूरा औरत के जैसी मजा ले कर चुदवा रही थी। इसका मतलब पहले से तुझे चुदाई का मजा मिल चुका है। है ना?” वे बोले।

फिर मैंने एक एक करके शुरू से लेकर अब तक की सारी घटनाएं बताती चली गई। चाचाजी विस्मय से आंखें फाड़कर सुनते जा रहे थे। “तो इसका मतलब तेरे नानाजी, दादाजी और बड़े दादाजी नें चोद चोद कर इतनी कम उमर में ही रंडी बना दिया, साले नतनी और पोती को भी नहीं छोड़ा। अबतक तू हमको मिला कर सात लोगों से चुदवा चुकी हैं। खूब सीख गई है रे तू मेरी बुर चोदी। खूब मजा आया तुझे चोद कर बिटिया।” वे बोले।

“हां राजा, मुझे भी बड़ा मजा आया, ऐसी चुदाई, वाह चाचा जी, आपने तो मुझे अपनी ग़ुलाम बना लिया। आज से पहले ऐसा लंड नहीं मिला था चाचाजी। आप तो बहुत मस्त चदक्कड़ हो मेरे बलमा। आज से मैं आप की भी कुत्ती बन गई मेरे प्यारे बूढ़े कुत्ते। आई लव यू,” कहते हुए मैं फिर उसे बेसाख्ता चूम उठी। मेरी इस अदा पर चाचा जी तो निहाल हो उठे। उन्होंने भी मेरे चेहरे पर चुंबनों की झड़ी लगा दी।

आगे की घटना अगली कड़ी में

आपलोगों की कामुक लेखिका

रजनी

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Rajni4u

मैं एक 51 साल की विधवा शिक्षिका हूँ। मैं कामोत्तेजक कहानियां पढ़ना, दोस्ती करना और दोस्तों से किसी भी प्रकार की चैटिंग करना पसंद करती हूं। मेरी रुचि संगीत में भी है। फिलहाल मैं अपनी कामुक भावनाओं को कहानियों के माध्यम से लोगों के सम्मुख प्रस्तुत करने का प्रयास कर रही हूं।