दीवाली पे ममता की चुदाई

मेरा नाम सौरव है और ये मेरी तीसरी कहानी है। बात इस साल दीवाली की है। मेरी कॉलेज की छुट्टियां थी तो मैं दिल्ली आ गया था। मेरी माँ ममता भी मुझसे मिलने दिल्ली आई थी। जैसा कि आप जानते ही हैं मेरी माँ कितनी खूबसूरत है। बड़े-बड़े स्तन, मोटी गोरी जांघ, यही देख कर हर बार मेरा लंड खड़ा हो जाता है। चलिए अब कहानी पर आता हूँ।

मेरी माँ दिल्ली आई थी। दिल्ली में हमारा घर है जिसमें मेरी बहन रहती है। मेरी माँ की उससे ज्यादा नहीं बनती इसलिए मैं और वो दोनों एक ही कमरे में सो रहे थे। दीवाली की शाम माँ बड़ी खूबसूरत लग रही थी तभी मैंने मन बना लिया था कि आज की रात और हसीन बनाई जाए। रात को जब मैं सोने को आया तो माँ सो चुकी थी। बिस्तर छोटा है इसका फायदा उठाते हुए मैंने एक टांग उसके ऊपर रख दिया और ब्रा के अंदर हाथ घुसा के लेट गया। मुझे मालूम नहीं था कि मां जागी हुई है। उसने बोला बेटा यहां नहीं कर सकते, गेट भी खुला था। फिर भी मैं हल्के हल्के उनकी चुचियाँ दबाता रहा। माँ अब गरम हो गई थी और हल्की आहें भर रही थी। तभी मैंने उनकी पेंटी सरका दी और अपना लंड पीछे से चूत पे रगड़ने लगा। चूत पूरी गीली थी। मैं मां के पीठ को चूम रहा था। माँ सिसकियाँ ले रही थी। मैंने हल्के से झटका लगाया और चूत इतनी गीली थी कि एक बार में मेरा लंड चूत के अंदर जा घुसा। मैं पीछे से हल्के हल्के धक्के लगा रहा था और आवाज़ नही कर रहे थे कि कहीं मेरी बहन न सुन ले। मैं कस के माँ की चुचियाँ दबा रहा था और पीठ पर चूम रहा था। अब मैंने झटके तेज़ कर दिए थे। पूरा लंड अंदर बाहर करने लगा था और मां की कमर भी सहला रहा था। माँ की सिसकियाँ तेज़ हो गई थी। तभी मां ने एक ज़ोर की सिसकी ली और अपनी जांघ कस के दबा ली। मां झड़ चुकी थी मगर मेरा अभी भी खड़ा था। मां बोली तेरा अभी तक नहीं निकला रुक मैं कुछ करती हूं। ऐसा कह के हो हल्के से मेरे ऊपर आ गई और अपनी चूत में लंड डाल के अपनी गांड गोल गोल कर के घूमने लगी। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। ये पहली बार था जब मैंने मां की चूत बिना कंडोम के मारी थी। मैं चुचियाँ चूस रहा था और माँ अपने चूत को ऊपर नीचे कर रही थी। मां ने रफ्तार बढ़ा दी थी, उनकी बड़ी चुचियाँ उछल रही थी। मैं दोनो हाथ से मां की कमर पकड़ रखी थी। अचानक मुझे लगा कि मेरे लंड को चूत ने जकड़ लिया है। अंदर से कुछ गर्म गर्म लग रहा था। मैंने कस के माँ की कमर को पकड़ा और अपना लंड बहुत तेज़ी से ऊपर नीचे करने लगा। सिसकारी पूरे कमरे में गूंज रही थी, डर भी लग रहा था कि कहीं मेरी बहन सुन न ले। फिर भी मैं धक्के लगाता रहा। मेरी जांघे मां के गांड से टकरा के अलग ही आवाज़ कर रही थी। उस आवाज़ से मेरा जोश और बढ़ गया। मैंने 3-4 धक्के और लगाए औरर मेरा सारा पानी चूत में निकाल दिया। माँ दुबारा झड़ चुकी थी। थोड़ी देर हम ऐसे ही लेते रहे। फिर दोनों ने कपड़े पहन लिए। मां ने मुझे कस के चूमा और उल्टा लेट गईं। मैं भी उनके ऊपर हाथ रख कर सो गया।

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