बचपन के प्यार

नमस्कार दोस्तों  | यह  मेरी vernar.ru per पर पहली कहानी हैं | यह  कहानी मेरी यानि साहिल ,अनामिका और सोनिया की है| यह कहानी  उस  समय  से शुरू होती है जब हम तीनो गांव के स्कूल में दसवीं क्लास मे   पढ़ते  थे | अनामिका  सांवली ,पतली  थी  और  उसकी चूचिया  गठी  हुई थी |  सोनिया थोड़ी मोटी  लेकिन  एकदम दूध  जैसी गोरी थी और चूचिया काफी  बड़ी थी और गांड के तो क्या कहने थे | मैं यानि साहिल गोरा , समान्य कद के साथ पढाई में काफी अच्छा था | उस  समय मैं अनामिका से प्यार  करता था  | कभी कभी लगता था की वह भी मुझे पसंद करती हैं लकिन कह नहीं पा  रही है | मेरा एक परम मित्र  था , सुरेश | सुरेश सोनिया पर लाइन  मारता था | और सोनिया भी उसे  पसंद करती थी |  सोनिया ने ही सुरेश को बताया था  की अनामिका मेरे बारे मैं अक्सर बाते करती हैं |  हमलोग  उस समय नय नय जवान हों   रहे थे इसलिए हमेशा अनामिका को चोदने के लिए सोचता था | ठरकी तो थे ही इसलिए सोनिया के चुत के बारे में  भी सोचकर मुठ मार लिया करते थे |लकिन ग्रामीण परिवेश के कारण लड़को, लडकियों के बीच ज्यादा बाते नहीं होती थी , इसलिए दोनों की चूतके बारे में सोचते हुए मुठ मारकर मेट्रिक की परीक्षा पास कर ली|

मेट्रिक की परीक्षा पास करने के बाद में आगे की पढाई करने के लिए बड़े शहर आ गया और अनामिका , सोनिया ने बगल के शहर के  कॉलेज में एडमिशन ले लिया| उसके बाद से  उनलोगों को कभी नहीं देखा|| पांच साल बाद किसी से पता चला की उन दोनों की शादी हो गयी है| मैंने अपनी पढाई जारी रखी और इंजीनियरिंग करने के बाद बहुत बड़ा सरकारी ऑफिसर बन गया| सोनिया , अनामिका की यादे काफी पीछे छुट चुकी थी| समय के साथ मेरी भी शादी एक सुंदर लड़की से हो गयी | जिन्दगी अच्छी चल रही थी/ पैसा रुतबा सब था| सेक्स लाइफ काफी अच्छी थी|ठरकी तो शुरु के ही थे ,सो अपनी बीबी को जमकर चोदते थे| बीबी भी चुदाई में पूरा साथ देती थी | उसे गांड चुदवाने में बड़ा मज़ा आता था | चुदाई का आलम यह था की बीबी को किचन में चाय  बनाते हुए , पीछे से साड़ी उठाकर चूत चाटकर गरम कर देता था और रसोई में ही कुतिया बनाकर चोद देता था |उसे रसोई में अपनी टांग उठाकर गांड मरवाना बहुत पसंद है| लकिन  उसको  लंड चुसना जयादा पसंद नहीं था , बहुत अनमने ढंग से चुस्ती थी , लकिन मैं काफी जोश में उसकी चूत चाटता था |चोदते चोदते कब दो बच्चो के बाप बन गए पता ही नहीं चला|

विभाग में अब मेरा प्रमोशन हो चूका था / मै अब और बड़ा साहब बन चूका था , परन्तु  प्रमोशन के साथ ट्रान्सफर भी होन गया था|  दिल्ली अब मेरा नया कार्यस्थल था| कुछ ही दिनों में अपने  परिवार के साथ दिल्ली आ गया|| नया ऑफिस था  और पद भी काफी बड़ा था , इसलिए लोगो से मिलते मिलते कब २ महीने गुजर गए पता ही नहीं चला | हा, लेकिन नए जगह पर भी अपनी बीबी की चुदाई में कोई कमी नहीं की| चोद चोद कर में चूत को भोसड़ा बना दिया था और गांड का छेद भी बड़ा कर  दिया था| लकिन एक बदलाव मैंने अपनी बीबी में देखा की वो अब बहुत अच्छे से मेरा लंड चुस्ती थी| कभी तो सुबह  -सुबह ही   मेरे लंड को चूसकर मेरी नींद तोड़ देती  थी , और टंगे फैलाकर चुद जाती थी | शायद यह दिल्ली के पानी का असर था|

दिल्ली में जिन्दगी अपनी रफ्त्तर से चल रही थी| बड़े बड़े बिल्डर्स , कॉन्ट्रैक्टर्स के बीच  मेरा काफी रुतबा था | फाइल क्लियर करने के लिए मेरे आगे पीछे लगे रहते थे| लकिन में किसी को अनावश्यक परेशान नहीं करता था , इसलिए सब मेरी बहुत इज्ज़त करते थे|

एक दिन महेश नाम का एक कांट्रेक्टर मिलने के लिए आया | बातचीत के दौरान पता चला की वो मेरे ही जिले का हैं | वह एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करता था | वो बहुत परेशान था |   पूछने पर बताया की यदि उसने २ दिन के अंदर  फाइल मेरे से  sign नहीं करायी तो कंपनी उसे नौकरी से निकल देगी | मैंने फाइल देखि , उसमे कुछ टेक्निकल प्रॉब्लम थी | मैंने उसे इसके बारे में बातया तो मेरे पैर पड़ने  लगा| चकी वो मेरे जिले का था मैंने  प्रॉब्लम इगनोरे करते हुए फाइल sign कर दी| मैंने उसकी नौकरी बचा दी थी, उसके बाद से वो मेरा भक्त हो गया था | महेश किसी न किसी काम से मेरे ऑफिस आता रहता था | अब उससे अच्छी पहचान हो गयी थी| अक्सर लंच भी साथ कर लेते थे | महेश अक्सर ड्रिंक भी करता था और उसने बताया था की उसकी बीबी भी साथ में करती है और इस तरह की बाते दिल्ली में आम हैं|कई बार उसको मैं अपने घर पर भी ले गया था | चुकी वो हमारे जिले का था , मेरी बीबी भी उसकी मानती थी | महेश को उसकी  कंपनी ने दिल्ली में फ्लैट दिया था जिसमे  अपनी बीबी और दो बच्चो के साथ रहता था | मैं अभी तक उसकी फॅमिली से मिला नहीं था |

कहानी में ट्विस्ट तब शुरु होता हैं जब महेश ने मुझे बतया की कंपनी ने उससे फ्लैट वापस ले लिया है और उसे दो दिन के अंदर फ्लैट खली करना हैं| इतनी जल्दी दिल्ली में फ्लैट का इंतजाम नहीं हो सकता था , इसलिए मैंने अपने रुतबे का इस्तेमाल करते हुए  दिल्ली से थोडा बाहर एक रूम के फ्लैट का इन्तेजाम कर दिया |और उसको भरोसा दिया की बहुत जल्दी में अच्छा सा फ्लैट दिल्ली में दिलवा दूंगा|महेश और उसकी फॅमिली ने चैन की सांस ली| फ़िलहाल उन्हें सर पर छत मिल गयी थी|

महेश ने मुझे बतया की उसकी फॅमिली मुझको थैंक्स कहना चाहती हैं , इसके लिए में अपनी बीबी को लेकर आज रात उसके घर डिनर पर आऊ| में भी कभी उसकी फमिली से नहीं मिला था इसलिए सोच की चलो आज मिल लेते हैं| लकिन बीबी के घर से कुछ लोग आ गए थे , इसलिए उसने कहा की वो फिर कभी चली जाएगी|इसलिए में अकेला ही महेश के घर चला गया|

रात को थी ८ बजे में महेश के घर  पहुच गया | किस्मत को कुछ और मंजूर था | महेश ने अपनी बीबी से मुझे मिलवाया | उसकी बीबी को देखकर मेरे आश्चर्य का ठिकाना न रहा | महेश की बीबी कोई और नहीं बल्कि अनामिका थी , जो मेरे साथ स्कूल में पढ़ती थी |वो पहले से बहुत जयादा खुबसूरत हो गयी थी | उसका शरीर गदरा गया था | चुचिया बड़ी- बड़ी और  पृष्ट हो गयी थी| किसी भी तरह वो दो बच्चो की माँ नहीं लग रही थी|

अनामिका भी मुझे देखकर चौंक गयी थी| लकिन  वो  महेश के सामने  अनजान बनी रही , जैसे वो मुझे जानती ही  नहीं हो| मैं भी अनजान बना रहा और इस बारे में कोई जिक्र नहीं किया|| हमने खाना खाया और महेश के कहने पर मैंने  भी ड्रिंक भी  ले लिया , आखिर पहला प्यार जो सामने था| अनामिका ने भी ड्रिंक में हमारा साथ दिया| इसके बाद मैं पुरानी बाते सोचते हुए घर आ गया |घर आकर  अपनी बीबी में अनामिका का चेहरा  की कल्पना करते हुए दुगने उत्साह से चोदने लगा | आज वो मेरे उपर थी |बीबी ने पूछा भी क्या बात हैं , महेश जी ने क्या खिला कर भेजा है| मैंने हसते हुए कहा की महेश की बीबी ने बहुत अच्छे से स्पेशल खाना खिलया है , यह कहकर मैंने उसकी चुत में लंड की स्पीड और बढ़ा दी | मेरी बात सुनकर वो भी शरारत के साथ हसने  लगी और अपनी चुचिया मेरे मुह पर जोर जोर से हिलाने लगी |मैं और गरम हो गया और लंड चूत से निकलकर तुरंत उसकी गांड में डाल दिया |हलकी से सिसकारी भरने के बाद वो मज़े लेने लगी | चूत और गांड तो मैं अपनी बीबी की मार रहा था, पर दिल में अनामिका का ही चेहरा घूम रहा था|वो संतुस्ट होकर अपनी गांड उपर कि ओर करके सो गयी| लकिन मेरे दिमाग में सिरफ़ अनमिका कि चुत का नशा छया हुआ था| आलम ये था कि दो घंटे में मेरा लंड फिर सलामी देने लगा | बीबी गांड उपर कर के सो रही थी | मैंने लंड पर थूक लगाया और गांड में घुसा दी | बीबी ने अनमने मन से मुझे देखा फिर गांड हिला कर लंड  पूरा गांड में ले ली | मैं निहाल होकर चुदाई करने लगा | कुछ देर बाद बीबी ने कहा चूत भी चोद देना | फिर मैंने उसकी दोनों टांगे उठाकर चूत चोदी और पूरा माल चूत मैं छोड़ दिया | फ्रेश होकर मैं भी सोने चला गया | मैं अब किसी तरह अनामिका से मिलने का मौका खोज रहा था |

अगला दिन रविवार का था और महेश को आज ही किसी तरह सामान शिफ्ट करना था | लकिन कंपनी वालो ने परेशान करने के लिए उसे किसी काम से बॉम्बे जाने को कहा | महेश ने मुझेसे मदद मांगी की सामान शिफ्ट करने में अनामिका की हेल्प् कर दे | मेरी बीबी भी उस दिन अपने मायके जा रही थी | अब मुझे अनामिका को चोदने का सपना पूरा होते हुए नज़र आ रहा था | मैंने महेश को कहा की वो निशिन्त रहे | मैं सामान शिफ्ट करवा दूंगा | मैं सुबह दस बजे अनामिका के यहाँ पुच गया |

कहानी का असली क्लाइमेक्स यही से शुरु होता है की कैसे मैंने अनामिका की चूत उसके माना करने के बावुजूद भी चोदी और अनामिका के यहाँ सोनिया भी कैसे मिल गयी और उसकी गांड कैसे मारी| फिर मेरी बीबी के साथ क्या हुआ |

अगर आपलोगों को मेरी कहानी पसंद आई तो प्लीज कमेंट केरके मेरा उत्साह बढ़ाये जिससे मैं कहानी का दूसरा भाग लिख सकू |

मेरे ईमेल है- [email protected]

Comments