बीबी ने मेरे एहसान का बदला सेक्स देकर चुकाया

यह मेरे बहुत सारी सच्ची कहानियों में से एक है. उम्मीद है जनता इसे पसंद करेगी.

मेरा नाम जावेद खान है और में 51 वर्ष का हूँ. मैं गोरा, सुन्दर और काफी सेक्सी हूँ. बात उस समय की है जब मैं एक कंपनी में GM के पद पर था. उस कंपनी में करीब 700 से अधिक लोग काम करते थे. अधिक तर काम करने वालों की उम्र 40 वर्ष के अंदर थे. एकबार कंपनी में एक कर्मचारी, राकेश (42 वर्ष) से बहुत बड़ी गलती हो गयी जिसके चलते कंपनी को करीब 40 लाख का घाटा हो गया. कंपनी मैनेजमेंट ने उसे तुरंत नौकरी से निकालने के लिए कदम उठाया. जब राकेश को यह बात पता चला तो मुझसे आकर मिला और नौकरी बचालेने की विनती करने लगा. मैं बोला ठीक है मैं कोशिश करूँगा. मैंने मैनेजमेंट से बात की के अनजाने में की गयी गलती को माफ़ किया जा सकता है, अनजाने में किसी से भी गलती हो सकती है. किसी तरह से मैंने मैनेजमेंट को मना लिया और राकेश की नौकरी बच गयी.

कुछ दिनों बाद एकदिन राकेश मेरे पास आया और बोला सर कल शनिवार है और आप मेरे घर रात का खाना खाने आएं और हम पति पत्नी को एक सेवा का मौका दें, आपने हमारा नौकरी बचाकर बहुत बड़ा उपकार किया है. मेरे मना करने पर वह ज़िद करता रहा और आखिर उसकी खाने का निमंत्रण मुझे स्वीकार करना पड़ा. दूसरे दिन रात 7 बजे रात मैं राकेश के घर पंहुचा. राकेश ने ही दरवाज़ा खोला और घर में आने का स्वागत किया. घर छोटा था मगर सब कुछ ढंग से था. राकेश अपने छोटे से ड्राइंग रूम में सोफे पर बैठा दिया और खुद सामने वाले सोफे पर बैठ गया और इधर उधर की बातें करने लगा. थोड़ी देर में उसकी बीबी बबिता (28 वर्ष, गोरी, लम्बा कद, 36-28-38) लाल डीप कट ब्लाउज़ और काले साड़ी पहने ट्रे में तीन गिलास सरबत लिए ड्राइंग रूम में आयी और मुझे नमस्कार करते हुए झुककर सरबत का ट्रे आगे बढ़ा दी. झुकने पर उसकी गोरी गोरी चूची साफ़ दिख रही थी. मेरा लण्ड तो दहाड़े मारने लगा मगर किसी तरह से अपने आपको कण्ट्रोल किया. मैं सरबत का गिलास ले लिया, राकेश भी सरबत का गिलास ले लिया और बबिता भी मेरे बगल में आकर बैठ गयी और वह भी सरबत का गिलास उठाकर धीरे धीरे सरबत पीने लगी. बबिता भी अपने शादी और इधर उधर की बातें करने लगी. सही मानो तो बबिता खूबसूरत और कमाल की गोरे बदन की मालकन थी. थोड़ी देर बाद बबिता किचन से ढेर सारा नास्ता, ड्राई फ्रूट्स और जूस लाकर रख दी और खाना बनाने चली गयी. मैं और राकेश इधर उधर की बातें करते रहे और जब बात ख़त्म हो गयी तो टीवी देखने लगे. करीब 10 बजे बबिता खाना रेडी करली और हमसब एकसाथ बैठकर खाना खाये. बबिता बहुत ही अच्छा और टेस्टी चिकन बिरयानी और बहुत सारा आइटम बनाई थी. खाना खाने और कुछ गप्पे मारने के बाद जब मैं जाने के उठा तो राकेश मेरा हाथ पकड़ लिया और बोला सर आज रात यही रुक जाए और हमें और भी सेवा का मौका दें, कल रविवार है और ऑफिस बंद है इसलिए कल सुबह नास्ता कर चले जाएंगे. मेरे मना करने पर भी दोनों पति पत्नी ज़िद करने लगे और आखिर मुझे उनकी बात माननी पड़ी.

मुझे एक बेड रूम दे दिए और मैं उसी में सोने चला गया. थोड़ी देर बाद राकेश कमरे में आया और बोला की सर लुंगी पहन लें और आराम से सोएं. मैं अपना पेंट और शर्ट उतार दिया और लुंगी पहनकर बेड पर लेट गया. थोड़ी देर बाद बबिता लाल रंग की नाईटी और अंदर बगैर ब्रा और पैंटी पहने मेरे कमरे में घुसी और पीछे पीछे राकेश. घुसते ही राकेश बोला की सर बबिता थोड़ा आपका बदन हाथ दबाकर सेवा करना चाहती है इसपर मैं बोला की राकेश इसकी कोई ज़रुरत नहीं है मगर मन ही मन तो इतनी सुन्दर माल से तो सेवा करवाने का दिल तो करने लगा और मेरा लंड तो फनफनाने लगा और एकदम से खड़ा हो गया जो लुंगी के बाहर से ही दिख रहा था. बबिता की नज़र मेरे खड़े लंड पर ही थी और वह वही खड़ी मुझे मुस्कुराते हुए देखती रही. राकेश वही पास के कुर्सी पर बैठ गया और बबिता बेड पर चढ़कर मेरे पैरो के पास आकर बैठ गयी और मेरा दोनों पैर धीरे धीरे दबाने लगी. पैर दबाते दबाते मेरे जांघो को भी दबाने लगी और कभी कभी मेरे लंड को भी दबा देती थी. मेरे बदन में करंट दौड़ने लगा और लंड तो दहाड़े मारने लगा. राकेश वही बैठा रहा और बीच बीच में बबिता को बोलता रहा की ठीक से सर की सेवा करो. थोड़ी देर बाद बबिता मेरी लुंगी थोड़ा उठाकर पैर दबाना शुरू करदी और मैं आँखे बंद कर चुपचाप मज़े लेता रहा. और थोड़ी देर बाद बबिता मेरी लुंगी जांघो तक उठा दी और पैर जांघ दबाती रही और थोड़ी देर बाद बबिता ने मेरा पूरा लुंगी ऊपर उठा दिया और मेरा लंड पकड़ कर सहलाने लगी. मैं दिखाने के लिए बोला बबिता यह क्या कर रही हो? इसपर बबिता बोली आज सर आप कुछ नहीं बोले और मुझे सेवा का मौका दें. राकेश भी सेवा की बात करने लगा. फिर क्या कहना जैसे अंधे को दो आंखे मिल गए हो. मैं चुपचाप वैसे ही पड़ा रहा. बबिता बोली सर आपका लंड बहुत मस्त है और मेरे पति से बड़ा है और फिर बबिता मेरा लंड चूसना शुरू करदी और मैं आँखे बंद कर स्वर्ग का आनंद लेने लगा. थोड़ी देर बाद बबिता ने मेरा गंजी और लुंगी उतरवा दी और स्वयं भी अपना नाईटी उतारकर नंगे हो गयी. मैं अब बबिता को अपने तरफ खींचकर अपने पास कर लिया और उसको पागलो की तरह उसके होठ, गला चूमने लगा और फिर उसकी सुडौल चूचियों को चूसने लगा और फिर उसको बेड पर लेटाकर 69 पोजीशन में उसका बूर चाटने लगा और वह मेरा लंड चूसती रही.

20-25 मिनट के बाद फिर मैं उठा और बबिता के पैरो को फैलाकर दोनों पैरो के बीच आगया. उसके गुलाबी बूर से पानी थोड़ा थोड़ा निकल रहा था. मैं राकेश की ओर देखा तो उसने कहा की सर मैंने बबिता को आज रात के लिए आपको सौंप दिया है आप सर जितना मज़े लेना चाहे ले लें. मैं बबिता के बूर के मुँह पर अपने लंड का सोपाड़ा रखकर झटके से धक्का दिया और पूरा लंड एक ही झटके में बबिता के बूर में घुसा दिया. बबिता के मुँह से निकला उई मां इतना बड़ा लंड एक ही बार में दाल दिया सर, बड़ा निर्दयी हो सर जी आप. अब मैं धीरे धीरे अपना लंड अंदर बाहर करके चोदना शुरू किया, बबिता भी अब मज़े लेने लगी और उऊँह आह उऊँह आह उऊँह आह उऊँह आह उऊँह आह उऊँह आह करने लगी. धीरे धीरे मैं अपने चरम सीमा पर आने लगा और फिर राकेश की ओर देखा तो वह बोला झाड़ दो सर अपना वीर्य (Semen) मेरी बबिता के बूर में, आपका वीर्य नहीं अमृत है सर, इसका बूर तृप्त हो जाएगा सर. तबतक तो मैं अपने चरम सीमा पर आगया था और बबिता के बूर के अंदर अपना पूरा वीर्य झाड़ दिया. फिचकारी की तरह मेरा पूरा पूरा वीर्य धीरे धीरे निकल गया. मैं कुछ देर बबिता पर पड़ा रहा और फिर उसके ऊपर से हट गया. थोड़ी देर मैं और बबिता बेड पर ऐसे ही नंगे पड़े रहे और राकेश हमदोनो के सेक्स का मज़ा देख देखकर लेता रहा. मैं राकेश से बोला की तुम्हारी बीबी बहुत ही सुन्दर है और आज मैंने इसे पाकर स्वर्ग का आनद लिया हूँ. फिर राकेश जाकर कुछ जूस और ड्राई फ्रूट्स ले आया और मैं बबिता को अपने गोद में बैठा कर हम तीनो उसे धीरे धीरे जूस और ड्राई फ्रूट्स का मज़ा लेते रहे और मैं अपने हाथ बबिता के बदन और चूचियों पर फेरता रहा.

खाने पीने के बाद हम सब कुछ गन्दी बातें करते रहे और बबिता मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दी. देखते देखते मेरा लंड फिर फनफनाकर खड़ा हो गया और फिर वह मुँह में लेकर चूसने लगी और फिर डॉगी स्टाइल में मेरे सामने झुक कर बैठ गयी और मुझे अपना गांड चोदने को बोली. फिर क्या था मैं अपना मुसड़ लंड उसके गांड में डाल दिया. वह अपना गांड पहली बार चोदवा रही थी. उसका गांड बहुत टाइट था मगर बूर चोदने से अधिक मज़ा मिल रहा था मुझे. वह कहरती रही और मैं और मैं उसका गांड चोदता रहा और थोड़ी देर बाद एकबार फिर मैं झड़ा मगर उसके गांड में. और फिर हमलोग वैसी ही बेड पर लेटे रहे. मैं बबिता को बोला तुम बहुत अच्छी हो बबिता और मर्द को संतुस्ट करना जानती हो. इसपर बबिता बोली शुक्रिया सर मगर आप भी बहुत अच्छे है और औरत को मज़े देना और उसका मज़े लेना आपको सही मानो में पता है और मुझे भी बहुत आनंद आ रहा है. राकेश फिर किचन से ३ गिलास गरमा ग्राम दूध और मधु घोलकर ले आया और फिर हम तीनो साथ मिलकर धीरे पीते रहे और इधर उधर की बातें करते रहे.

बबिता फिर मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दी और मेरा लंड फिर फनफनाकर खड़ा हो गया. फिर बबिता मेरे लंड को बुरी तरह से चूसने लगी और मुँह से मस्ती के उऊँह उऊँह उऊँह उऊँह उऊँह उऊँह की आवाज़े निकालने लगी. धीरे धीरे मेरा लंड और टाइट होता गया और फिर फिचकारी की तरह वीर्य (Semen) निकलकर बबिता के मुँह में अंदर जाने लगा. गर्म गर्म वीर्य बबिता पीती रही और लंड को उसी तरह चूसती रही. लंड के इधर उधर फैले वीर्य को बबिता चाट चाट गयी. मैं और बबिता अब तक काफी थक चुके थे. राकेश उठते हुए बोला सर आप दोनों आराम करो अब सुबह हम दोनों मिलेंगे और यह कहकर राकेश दूसरे कमरे में सोने चला गया. बबिता मेरे बगैर में आकर लेट गयी. हम दोनों नंगे थे और मैं बबिता को अपने बाहों में ले लिया और कब मुझे नींद आगयी पता ही नहीं चला. सुबह मुझसे पहले बबिता की नींद खुली और उसने मुझे उठाया और बोली सर एक बार मेरा बूर कल रात की तरह और चोद लो और तब मैं नास्ता बनाने चली जायूँगी. मैं भी फटाफट उठा और उसको लेटाकर उसका फेयर फैला दिया और अपना मुसड़ लंड उसके बूर में एक ही धक्के में पूरा का पूरा डाल दिया और लंड अंदर बाहर धीरे धीरे करना शुरू कर दिया. हम दोनों मस्ती में ऊँह आह ऊँह आह ऊँह आह ऊँह आह ज़ोर ज़ोर से करने लगे. हमदोनो की आवाज़े सुनकर राकेश भी उठकर आ गया और हमारे बेड पर बैठ गया और चोदाई के नज़ारे को देखकर मज़े लेना लगा. इसबार बबिता पहले गर्म हो गयी और और झड़ने लगी. उसके बूर से गाढ़ा गाढ़ा पानी फिचकारी की तरह काफी सारा निकला और तब तक मैं भी चरम सीमा पर आकर उसके बूर में झड़ गया. थोड़ी देर मैं बबिता के ऊपर लेटा रहा और फिर हैट गया. कुछ देर बाद बबिता उठी और मुझे चूमि और चली गयी. मैं भी उठा और ब्याह रूम में नहाने चला गया. थोड़ी देर बाद जब मैं नास्ता वगैरह करके निकलने लगा तो दोनों ने नौकरी बचने और आने का आभार व्यक्त क्या और मैंने भी उनका आभार व्यक्त क्या इतने शानदार गिफ्ट के लिए. उन दोनों आग्रह किया की जब भी मन करे आप आ जाना सर बबिता आपके लिए तैयार मिलेगी और फिर मैं वहां से विदा लिया.

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