मकान मालिकिन की चूत में लंड

तब मैं जयपुर मैं नया नया ट्रांसफर ले के गया था. बेंक की नौकरी में यह मेरा तीसरा ट्रांसफर था और मैं इस से तंग आ चूका था. जयपुर स्टेशन के करीब ही कुछ दिन एक सस्ते होटल में दिन गुजारने के बाद मैंने होटल के ही एक वेटर की मदद से एक किराये का कमरा ले लिया. यह मकान एक विधवा औरत का था जिसका नाम सुषमा था, मेरी कहानी सुषमा की चूत में लंड देने की ही है. सुषमा वैसे तो ठीक थी लेकिन किराया वसूलने ने में वह बहुत अकडू थी और महिना ख़तम होते ही वह रूम में आ जाती थी.

सुषमा भी भरी जवानी में ही विधवा हो गई थी उसकी उम्र मुश्किल से 35 की होगी. वह गोरी और भरी हुई काया की मालिकिन थी. मैं उसके लिए दिल में कोई बुरा ख़याल नहीं रखता था लेकिन एक दोपहर जो हुआ वह मेरे लंड को उठाने के लिए काफी था.

दोपहर को मेरा लंड खड़ा हो गया सुषमा को ऐसे देख

बेंक होलीडे होने की वजह से मेरी छुट्टी थी और मैंने दोपहर के करीब 1 बजे तक सोया हुआ था. उठ कर मैंने आज मूवी देखने जाने का इरादा बनाया था 3 से 6 के शो में. मैं उठा और टॉयलेट में गया, अभी हगना आधा ही हुआ था की मुझे बाथरूम से आह आह ओह ओह आह…ऐसी आवाजे आ रही थी. सुषमा के घर में बाथरूम और टॉयलेट के बिच एक इंट का छेद बना था जिसे यह लोगो ने मोटे कागज से ढँका हुआ था लेकिन अगर कागज को थोडा सरकाया जाए तो झाँका जरुर जा सकता था. मैंने उत्सुकतावश कागज थोडा खोला और अंदर देखा की सुषमा बाथरूम में खड़ी हुई थी और उसके चूत का भाग मेरे सामने था. उसने अपनी चूत के अंदर एक लाल रबर का डिल्डो लिया हुआ था जिसे वह अपनी दो ऊँगली से चूत के अंदर बहार कर रही थी. मेरा लंड वही खड़ा हो गया, वैसे भी लंड को चूत की खुराक मिले काफी दिन हो गए थे. सुषमा को यह हालत में देख मेरे जहन में उसका सेक्सी बदन अब आँखों के सामने आने लगा, वो बदन जिसे मैं कितने दिनों से नजरअंदाज किए था. सुषमा जैसे मैं कहाँ मुश्किल से 35 की लगती थी. उसके चुंचे भारी और लम्बे काले बाल थे. उसका आवाज भी मस्त पतला था, बिलकुल उसकी कमर की तरह….मेरा लंड अब इस विधवा की चूत पाने को बेकरार होने लगा था. मैंने एक बार और अंदर देखा और सुषमा की चूत के अंदर वही डिल्डो की आवनजावन लगी हुई थी साथ ही में सुषमा आह आह आह करती जा रही थी.

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