मेरी चचेरी बहन

मेरी चचेरी बहन रेखा इनदिनो कांनपुर मे थी! हमलोग के परिवार मे पापा, मम्मी और मै राहुल साथ रहा करते थे, रेखा एक कोचिग के बारे मे जानने के लिये अपने गांव से कानपुर आई थी ! रेखा 18-19 साल की मद्मस्त जवानी थी, उसके दो चुची गोल सनतरे की तरह दिखते थे और चुत्तर का हिस्सा काफ़ी गोल और गुम्बदाकार था ! अगले सुबह वो स्नान करके नास्ता की और मुझे बोली….. “भैया मुझे अपने बाइक से स्वरूप नगर छोड़ दो

(राहुल) ठीक है नास्ता करने दो फ़िर चलता हू. ” रेखा स्कर्ट और टोप्स पहन रखी थी, दोनो स्वरूप नगर के लिये निकले, वो बाइक पर थोड़ी दुरी बनाए बैठी हुई थी ! हम् दोनो स्वरूप नगर जाकर कोचिंग़ का पता करने लगे !

दोपहर के 12:15 बजे रेखा का काम हो गया तो मै बोला….. “तुम औटो से घर निकल लो मै बाद मे आता हू

(रेखा) घर जाकर क्या करुंग़ी कही घुमाने ले चलो

(राहुल) चलो तुमको जन्नत कि सैर कराता हू. ” रेखा को अपने बाइक पर बिठाकर पंकी पावर प्लांट कि ओर लेता गया, एक सुनसान पार्क मे लेकर रेखा को घुसा और दोनो घांस पर बैठ कर बाते करने लगे, लेकिन मेरी नज़र उसके चुचि पर थी! उसके करीब खिंसका और चुचि पर हाथ लगा दिया, रेखा घबड़ा गई और मै चुची को जोर -2 से मसल्ने लगा, वो मेरे हाथ को हटाने कि कोसिस करने लगी लेकिन मेरी मज्बुत पकड़ उसके चुचि पर थी, उसको दबाने लगा और रेखा….. “अबे हरामी तुम यही जन्नत की बात कर रहे थे, अपनी बहन को

(राहुल) रेखा 18-19 साल की जवान लड़्की मौज मस्ती नही करेगी तो क्या 70 साल मे मजे लेगी. “वो चुप रही और मै उसके करीब आ गया.

रेखा मेरे जङ्हा पर हाथ फ़ेरने लगी और मै उसको अपने बाहो के घेरे मे ले लिया ! वो मेरे जङ्हा पर अपने चुत्तर को रखकर बैठ गयी और उसका चुचि मेरे सिने से दब रहा था! रेखा को चुम्बन देते हुए उसके स्कर्ट को कमर कि ओर उठाने लगा, अब मै रेखा के गुलाबी ओंठो को चुसने लगा! वो मेरे सिने से अपनी चुची को रगड़ रही थी, रेखा अपना जिभ मेरे मुह्न मे घुसा दी और मै जिभ चुस्ता हुआ उसके स्कर्ट के अंदर हाथ घुसा चुका था! उसके चिकने चुत्तर को सहलाता हुआ मस्त था, तभी रेखा अपना जिभ मेरे मुह्न से निकाल ली ! वो शर्माकर मेरे कंधे पर अपना सर रख दी….. ” राहुल तुम तो 2-4 मिनट मे ही मेरा हाल खराब कर दिये

(राहुल) रेखा अभी तो प्यार का खेल शुरु भी नही किया हू. ”

रेखा मेरे सामने बैठी थी जब की मै उसके जाण्घ को सह्ललाने लगा, वो अब मेरे गिरफ़्त मे आ चुकी थी! उसके स्कर्ट को कमर तक कर् उसके नग्न जङ्हा और काले रंग़ के चड़्ही को देखने लगा, वो शर्म से सर झुका रखी थी ! उसके चड़्ही को उतारकर बुर का हिस्सा नग्न कर दिया, रेखा को अपने साम्ने खड़ा होने को बोला और वो जब टांग़ फ़ल्काकर खड़ी हो गयी, तो मै अपने घुटने के बल होकर उसके स्कर्ट को कमर तक कर दिया! रेखा की चुत चिकनी थी, उसपर बार के रोए उग आए थे, दोनो रान फ़ुली हुई थी मानो मेद्हक का आकर लिये हो ! मै बुर को चुम् रहा था और वो सिसक रही थी, उसके बुर को चुम्ने के बाद रान के बिच मे जिभ रगड़ने लगा, रेखा कि बुर के दोनो रान आपस मे सटे हुए थे फ़िर भी मै जिभ से बुर चाट्ने की कोसिस कर रहा था! रेखा के दोनो पेर कांप रहे थे जबकी मेरा जिभ उसके भगनासा मे घुसकर चाट रहा था, वो मेरे बाल को कसकर पकड़े हुए…. “भैया मेरी बुर मे किड़े रेंग़ रहे है अब चुसो ना. ” लेकिन मै बुर कुरेदना छोड़ कर उसमे उंग़ली करने लगा, रेखा कि गरम बुर मे उंग़ली रगड़्ता हुआ अपने लंड़ को जिंस से बाहर किया !

मेरे फ़ौलादी लंड़ को देख रेखा तड़्प उठी, अब वो मेरे सामने बैठकर मेरे लंड़ निहारने लगी, उसके हाथ को पकड़कर अपने लंड़ पर रख दिया, वो संकोच के साथ मेरा लंड़ पकड़ी और धीरे-2 हिलाने लगी जबकी उसके चुचि को दबाता हुआ मै मस्त था, बोला….. ” रेख़ा लंड़ को मुह्न मे लेकर चुसो ना बहुत मजा आएगा

(रेखा) लेकिन मुझे चुसने नही आती

(राहुल) लोलिपोप कि तरह चुसो. ” और रेखा मेरा बात मान गयी, अब वो झुककर लंड़ थामे उसपर चुम्बन देने लगी तो मै उसके चुत्तर को सहलाने लगा! रेखा लंड़ के सुपाड़े को मुह्न मे भरी और धीरे-2 1/2 से अधिक लंड़ मुह्न मे ले ली, जबकी मेरा हाथ उसके नितम्ब पर घुम रहा था, उस्के स्कर्ट को कमर तक करके बुर मे उंग़ली पेल दिया और बुर कुरेद्ते हुए लंड़ चुस्वा रहा था, पल भर बाद वो लंड़ मुह्न से बाहर की और जिभ से लंड़ चाट्ने लगी ! पल भर बाद तो रेखा मुखमैथुन करने लगी और उसकी बुर से रस निकल आया, वो मुह्न का झटका मेरे लंड़ पर दे रही थी और मै अब झड़्ने पर था, उसके सर पर हाथ लगा कर लंड़ और अंदर पेला और चिंख पड़ा….. “मेरा रस निकाल दी पी ले बे रंड़ी. ” वो ना चाह्ते हुए भी रस को पी ली और विर्य मेरे झांट पर भी गिरा, हमदोनो थक कर बैठे रहे और वो पानी पीकर अपने कपड़े को ठीक की ! फ़िर दोनो घर आ गये

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Linga11

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