साइकल की चैन – भाग 1

हेलो! दोस्तो.
मेरा नाम रिज़ है। ये मेरी पहेली कहानी लिख रहा हु। आप सभी सोच रहे होंगे के ये कहानी का कैसा नाम है “साइकल की चैन” ये आप को आगे पता चल ही जाइयेगा।
मैं कहानियों को डेली पढता हु। मैं अपने बारे में बतना भूल ही गया. मैं रिज़वान मेरे सभी दोस्त मुझे रिज़ बुलाते है, डेली जिम जाता हु मस्क्युलर बॉडी है, हाइट 5.11, लिंग का साइज 6 इंच है ओर स्टैमिना इतना के किसी भी लड़की को खुश लर दु, उम्र 24 साल,
मेरे घर मे हम चार लोग है, मेरे माँ डैड, मैं ओर मेरा छोटा भाई, मेरा ग्रेजुएशन पूरा हो चुका है, मेरे डैड का गराज है जहाँ 27 वर्कर है, माँ हाउसवाइफ है, मेरा छोटा भाई मेरे चाचा के यह रहता है दिल्ली में, क्योकि उन्हें कोई बच्चे नही है।
अब बढ़ते है कहानी की ओर….
ये कहानी मेरी अपनी है और सच्ची है. इसकी शुरवात 4 साल पहले हुई थी। मैं 20 साल का था तब तक मेरी कोई गर्लफ़्रेंड नही थी। जैसे कि मैंने बताया मेरे डैड का गराज है.
मेरा कॉलेज सुबह 7 से 12 बजे तक रहता था जैसे ही
कॉलेज 12 बजे खत्म हुआ तो फ्रेश होते ही 1 बजे में गराज चला जाता,
सभी दोस्तों की गर्लफ्रैंड थी सभी अपनी सेक्स लाइफ के बारे में बताते. मेरा भी मन होता कि मेरी भी कोई गर्लफ्रैंड हो जिस के साथ मे सेक्स कर सकू लेकिन मेरी इतने अछि किस्मत कहा थी मेरी तो गर्लफ़्रेंड ही नही थी।
एक दिन गैराज पर एक नया लड़का राजेश जॉइन हुआ। डैड ने उसे गेट पर गैराज में आने वाली गाड़ियों के एंट्री कर ने के लिए रखा था ..
मैं भी उसके साथ बाते कर ने चला जाता वो भी 20 साल का ही था इस लिए अछि जमती थी। राजेश ने एक दिन मुझ से कहा भैया एक लड़की आपको रोज़ देख ते हुए इधर से जाती है मैं उसे पन्द्रह बिस दिन से देख रहा हु.. वो आप को देख ते हुए यह से जाती है. पहले तो मुझे लगा के वो मज़ाक कर रहा है। फिर अगले दिन मैं गेट के पास बने कबिन में गया तो 5 बज रहे थे (डेली यही वक्त मैं उस के साथ बैठ ने आता था)। उसने मुझे एक लड़की के तरफ इशारा कर ते हुए दिखाया कि ये लड़की आप को देख ते हुए जाती है. मैं उसे देख रहा था।
उस लड़की के चेहरे पर काले कलर का स्कार्फ बाधा हुआ था. सुरमई कलर की आँखे दिख रही थी. रंग गोरा
हात कोहनियो तक गलौज से ढके हुए, लाल कलर का टॉप जिस पर काले रंग से फूल बने हुए थे, लाइट स्काई ब्लू कलर की स्किन टाइट जीन्स, पैरो में जूती ब्राउन कलर की, सफेद कलर की स्कूटी पर बैठे हुए मेरी ओर देखते हुए जारही थी। मेरी ओर उस की नजर आपस मे टकराई, मैं तो बस उसे ही देखता रहे गया.. ऐसा एक महीने तक चला. मैं उसे देख ने के लिए अब रोज 5बजे वह बैठ ने लगा वो भी मुझे देखती ओर मैं भी,
मेरे में हिम्मत नही थी उससे बात कर ने की इस लिये मामला आगे नही बढ़ रहा था।
19 जुलाई का वो दिन था, हल्की बारिश हो रही थी, 5 बजते ही मैं उस लड़की को देख ने आ गया। गैराज में आज काम ज्यादा था तो राजेश को गाड़ी की डिलीवरी देने डैड ने कही भेज दिया था. मैं गेट के पास रुख कर उस लड़की का इन्तेजार कर ने लगा 5.30 हो गए वो नही आयी. मुझे लगा आज नही आयेगी तब ही वो लड़की साइकल धकेल ते हुए मेरे पास आई और बोली मेरे “साइकल की चैन” गिर गई है, बिठाने में मेरी हेल्प कर दो. मैं तो बस उसे ही एक टक लागए हुए देख रहा था. कितनी मीठी आवाज थी. मैन तो अब तक उसका चहेरा भी नही देखा था. लेकिन आवाज बहोत ही मीठी थी. उस ने मुझे थोड़ा उचे आवाज में कहा मेरी मेरी हेल्प करोगे. मैं अपने खयालो में से बाहर आते हुए. हकलाते हुए कहा. ह.. हा. अभी..अभी..ठीक करता हु..
उसके साइकल की चैन फिट कर ने के बाद मैं उसे ही देख रहा था. आज उस ने चहेरे पर रेड कलर का स्कार्फ बाधा हुआ था. पिले कलर का पंजाबी सूट में वो गजब ढा रही थी. हल्की बारिश की वजह से उस के कपड़े भीगे हुए थे उसका टॉप उसके जिस्म से चिपक गया था.मेरी नजर उस के बूब्स पर गयी बारिश में भीगने की वजह से उसका पिंक कलर का ब्रा दिख रहा था. बूब्स का साइज 34 रहा होगा. कमर शायद 28 की ओर बम्ब 34के रहे होंगे. मैं तो बस खोया हुआ था उस ने मेरे कंधे को हिलाते हुए कहा थैक्स..
उस ने मेरा नाम पूछा मैं ने हकलाते हुए कहा रिज़वान नाम है.. उस ने मुझ से कहा, मैं मेरा नाम खुद ही बता दु या तुम पूछने वाले हो.. मै ने उसे नजर मिलते हुए. न.. नही.. मैं ही पूछ ने वाला था. आप .. का क्या नाम है…. वो मेरी तरफ घूर ते हुए बोली. सब को ऐसे ही बात कर ते होय मेरे साथ ही आप से आप कर रहे हो.. मैं ने कहा नही सिर्फ आप से.. वो बोली कितने बड़े डंम्बो हो..
मैं उसके तरफ देखते हुए. क्या…. वो हँसते हुए बोली कुछ नही.. मैन उस से कहा.. एक बात पूछ सकता हु.. उस ने कहा… हा पूछ सकते हो..
मैं तुम्हारा चहेरा देख सकता हु.. उसने मुझे घूरते हुए अपना स्कार्फ एकदम से हटा दिया… मैं सन्न रहे गया उसे देख कर..
सुरमई आँखे, आखो में काजल.. खड़ी नाक, गुलाबी मुलायम.. मुलायम गाल, पक़तले से ओठ गुलाब की पंखुड़ी की तरह दिख रहे थे… सुनहरे लब्बे बाल उस के कमर तक आरहे थे…
उसने मुझ से मुह बनाते हुए पूछा बहोत बुरी दिखती हु न मै…
मैं- नही यार तुम तो बहोत ही खूबसूरत दिखती हो.. ओर..
मेरी बात काट ते हुए उस ने मुझ से कहा.. मेरा नाम नही पूछोगे..
मैं- अरे हा तुम्हारा नाम क्या है..
वो- मेरा नाम नेहा है.. मैं यही पिछली गली में रहती हूं..

ऐसे ही बाते चल रही थी तब ही अचानक बारिश जोरो से होने लगी।। उसने कहा कि हम बाद में मिल ते है।। मैन हिम्मत कर के उसए उसका मोबाइल नंबर माग.. तो वो बोली बड़े फ़ास्ट हो… मैन सॉरी कहा.. वो हसने लगी और नंबर दे दिया…. ओर साइकल पर बैठ ते हुए मुझ से कहा! मैं तुम्हारे कॉल का इन्तेजार करुँगी ….. मैं बहोत खुश था. किसी लड़कीं से पहेली बार मोबाइल नंबर माँग था….. बारिश तेज हो गई तो मैं गैराज की ओर भागते हुए डैड के ऑफिस में चला गया… डैड से कहा मैं घर जारहा हु. ओर बाइक की चाबी ली और निकल गया घर की तरफ..(बारिश में बाइक चलाने का एक अलग ही मज़ा होता है….)
घर आया फ्रेश होने के बाद मैं अपने कमरे में जाते ही उसे कॉल किया.. दो रिंग बजी ही थी तो उस ने कॉल उठा लिया..
मैं- हेलो…. नेहा?
नेहा- हा मैं ही बोल रही हु,
मैं- इतने जल्दी कॉल रिसिव कर लिया?
नेहा- कब से मोबाइल की ओर देख रही थी कब तुम्हारा कॉल आये गया और कब तुम से बात हो? कब से वेट कर रही थी..
इतना इंतेजार करते है क्या?
मैं- वो बारिश हो रही थीं न…. तो बारिश में भीग रहा था..
नेहा- हम्म… मुझे भी बारिश में भीगना पसंद है..

मैं- एक बात बताऊ
नेहा- हा बताओ…..
मैं- मैं तुम्हे बहोत पसंद करता हु, तब तुम्हारे सामने बोल ने की हिम्मत नही हो रही थी.. तुम्ह मुझे पसंद हो.. I LOVE YOU….. (उधर से कुछ आवाज ही नही आई मुझे लगा मैं ने जल्दबाजी कर दी)
(1 मिनट बाद आवाज आई)
नेहा- मैं भी तुम्हे बहोत दिनों से पसंद करती हु. मैं तुम्हे रोज़ देख ते हुए जाती थी लेकिन तुम हो के सिर्फ देख ते ही थे, बात तो करते नही थे… इसलिए आज मैं ने हिम्मत कर के साइकल की चैन खुद गिरा दी ओर तुम्ह से हेल्प मांगने के बहाने तुम से बात की.. तुम बड़े वाले डंबो हो.. कोई लड़कीं रोज़ तुम्हे देखती है और तुम उससे बात भी नही करते

मैं- डर लगता था कभी किसी लड़कीं से बात नही की.. ओर तुम से बात करुगा तो कही तुम मना ना करदो..इसलिए.

नेहा- ओह्ह.. I LOVE YOU TOO….. मैं तुम्हे बहोत चाहती हु..

मैं- (खुशी के मारे चिखकर) से सच मे …

नेहा- हा बाबा सच मे…

( इतने में मेरे मम्मी की आवाज आई… रिज़वान सब ठीक तो है न.. क्यो चिलारहे हो.. मैं नही मम्मी सब ठीक है. )

मैं नेहा से- ई लव यू यार..
नेहा – ई लव यू टू न यार.
ऐसे ही हम रोज़ बाते कर ने लगे। हम एक दूसरे की पसंद ना पसंद पर बाते करते..
उस के घर के बारे में मैं ने उससे पूछा तो उस ने बताया था के उस के घर मे वो ओर उस के पापा ही है.. उस की मम्मी की डेथ हो चुकी है.. उस के पापा जॉब पर थे और वो उससे बहोत प्यार कर ते थे इसलिए दूसरी शादी नही की.. उन की जॉब सुबह 10 बजे से शाम 8 बजे तक थी..
नेहा बीएससी 2nd year की स्टडी कर रही थी… उसका कॉलेज भी सुबह से ही था सुबह सात से बारा बजे तक…
जिस दिन वुसे ने मुझे पहली बार देखता वो मैथ के ट्यूशन से आरही थी उस का ट्यूशन टाइम 3 बजे से 5 बजे तक होता है.
मैन नेहा से पूछा भी हम कब मीलेगे… लेकिन वो बात को काट देती.. मै भी नेहा से इस बीच प्यार कर ने लगा था.. मैं नेहा को सेक्स के चकर में खोना नही चाहता था.. वो बस मेरे बारे में ओर जानना चाहती थी.. ओर मैं भी… हम दोनो एक जैसे ही थे अपनी इछाये किसी को नही बताना बस अपने तक ही।। पर जब से मुझे नेहा मिली थी तो मैं उसे अपनी सारी बाते बात ता. वो भी मुझे सभी बाते बताती .. रात के 10 बज ते ही हम फोन पर लग जाते.. कभी रात के 2 बज ते तो कभी 4 भी.. हम दोनों एक दूसरे को समझ रहे थे. अब हम कॉल पर की किस कर ते .. नेहा का मुझे अलग अलग नामो से बुलाना अच्छा लगता था..
हमे मिले हुए करीब 20 दिन हुए थे, उसका उस दिन कॉल ही नही आया. मैन उसे कॉल किया तो नेहा ने पहले उठाया नही मैन फिर से किया नेहा ने कॉल उठाया.. उसकी आवाज में दर्द था.. आवाज में कमजोरी महसूस हो रही थी। मैन नेहा से पूछा क्या हुआ पहले तो उसने बात को टालते हुए कहा कुछ नही हुआ.. मेरे जोर देने पर उस ने बताया के पेट मे दर्द हो रहा है.. बस इतना उसके बोल ने पर मैं उसके घर शिफा अप्पी को लेके उसके घर चला गया। शिफा अप्पी मेरी कजिन है वो डॉक्टर है.. उन्हें लेके नेहा के घर पहोच गया.. बेल बजायी तो उस के घर की नोकरानी ने दरवाजा खोला (उस के घर के बारे में बाद में बता ऊगा) नोकरानी हेमा से पूछा के नेहा कहा है तो उसने रूम के ओर इशारा कर ते हुए बताया वहा..
उस के रूम में गए तो नेहा ने मुझे देखते ही कहा तुम यह! फिर मैंने उसे कहा डॉक्टर आयी है .. वो अपने माथे पर हात मार ते हुए कहा तुम भी ना… शिफा अप्पी ने मुझ से कहा तुम बाहर जाओ .. दोनों की क्या बाते हो रही थी पत्ता नही…
नेहा की नोकरानी हेमा ने मुझ से पूछा तुम को हो और डॉक्टर को क्यों लाये हो.. मैं ने हेमा से कहा… नेहा का पेट दर्द कर रहा है इसलिए.. हेमा ने महू सिकुड़ते हुए सर हिलाया ओर वह से चली गई… मुझे कुछ समझ मे ही नही आया इसने ऐसा क्यों किया…
उतने में शिफा अप्पी बाहर आई और मुझ से कहा सब ठीक है.. ओर मेरी ओर देख कर हसने लगी…
मैं नेहा के रूम में गया उस के बेड पर उस के पास जा कर बैठ गया. नेहा ने मेरा हात अपने हातो में लेते हुए कहा … इतनी फिक्र है मेरी.. उसकी आखो से आंसू आरहे थे… उसने फिर मुझे बताया कि सभी लड़कियों को महीने में पीरियड आते है.. तब कभी कभी पेट मे दर्द होता ही है.. तुम टेंशन मत लो… ओर हँसते हुए कहा तुम एक नंबर के डंबो हो…
ओर मेरे गाल पर किस किया.. मैन उसके हात पर किस कर ते हुए कहा मैं अप्पी को हॉस्पिटल छोर ने जाना है.. उस ने मुझे ई लव यू कहा.. मैन ई लव यू टू बोला.. ओर उस के माथे पर किस कर के वह से निकल गया…

8 या 9 दिन हुए होंगे नेहा ओर मैं मोबाइल पर बात कर रहे थे रात के 11 बज रहे थे .नेहा ने कहा कल सुबह 5.15 को मैं ट्यूशन जाती हु मुझे आके मिलना.. तुम्हारे गैराज के पीछे .. मैन ओक कहा और कॉल कट करदिया..
अगले दिन मैं सुबह 4 बजे उठ गया .. जल्दी से तैयार हुआ और पहोच गया गैराज के पास.. वो 5.15 को आयी.. इतनी हॉट लग रहीथी मैं तो बस देख ता ही रहे गया.
जीन्स ओर टीशर्ट में थी.. उसने कहा क्या देख रहे हो मैन
वुसे कहा तुम बहोत हॉट हो.. वो सच मे.. मैं- हा.. इतना बोल ते ही उसने मुझ गले। लगा लिया.. ओर कहा आज मुझे उस के घर आना है 10 बजे .. मैन ओक बोलते ही उसने अपने ओठ मेरे औठोस चिपका दिया और किस कर ने लगी मै ने भी लाइफ का पहला किस खुली सड़क पर किआ .. ओर वो चली गई
तो मानो हवा में उड़ रहा था..…घर आते ही मम्मी को बोल दिया था के आज कॉलेज नही जाना है और आज फ्रेंड्स के साथ बाहर घूम ने जाना है, ओर रात को लेट औ गया….. 9बजे बाथरूम में जाते ही पूरी बॉडी पर के हेयर रिमूव कर दिए.. जिम जाता हु तो बॉडी पर मैं वैसे भी बाल नही आने देता .. 9.45 तक रेडी हो गया.।।और चला गया बाइक लेके उससे मिलने.. उस ने मुझे क्यों बुलाया होगा क्या खास है ये सोच ते हुए उसके घर की ओर बढ़ रहा था… मेरे मन मे तो लड्डू फुटरहे थे…
मेरे दिमाग मे तो सुबह का उसका किस ही घूम रहा था..पता नही चला उस का घर कब आगया. मैन बाइक खड़ी की गेट के साइड में.. दरवाजे पर गया बेल बजाई .. मुझे लगा वो हेमा खड़ूस दरवाजा खोलगी.. लेकिन नेहा ने दरवाजा खोला. जैसे ही उसने दरवाजा खोला बस मैं उसे ही देखता रहे गया.
नेहा ने लाल कर्लर की बेबीडॉल नाइटी पहनी हुई थी…………………….

कहानी बाकी है मेरे दोस्तों…. जल्द ही पार्ट 2

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