कामिनी की कामुक गाथा (भाग 11)

पिछले अंक में आपने पढ़ा कि किस तरह नानाजी के ड्राइवर करीम चाचा ने मेरे बाप के साथ मिलकर मुझसे अपनी वासना की आग बुझाई। उन लोगों के बीच इतना बढ़िया तालमेल था कि जब दोनों मिलकर मुझे भोग रहे थे, उनके गठे शरीर के बीच पिसती हुई और उनके विशाल लिंगों से बिंधती हुई भी मैं संभोग सुख के अपार समुंदर में डूब गई थी। करीम चाचा नौवें व्यक्ति थे जिन्होंने मेरे तन से अपनी काम क्षुधा शांत की। करीम चाचा और मेरे बाप ने बड़ी ही बेरहमी और धमाचौकड़ी मचाते हुए मेरे बदन का उपभोग किया। अभी भी मुझे चोदने के बाद नंग धड़ंग मेरे अगल बगल लेटे मेरे नंगे तन को सहलाते हुए अपने पिछले दिनों की विभिन्न औरतों से हुई चुदाई की कहानी सुना रहे थे। यह मेरी ही जिज्ञासा थी जिसे अब करीम चाचा पूरी कर रहे थे। मैं सोच रही थी कि पिछले पांच दिनों में ही मैं किस तरह अलग अलग परिस्थितियों से गुजरती हुई पूरी तरह छिनाल औरत बन गई थी। इस दौरान मैं ने अपने अंदर एक अजीब तरह का परिवर्तन महसूस किया। मैं जानती थी कि मेरी मर्जी के बगैर कोई मुझसे जबरदस्ती नहीं कर सकता था, केवल सरदार वाले एपिसोड को छोड़ कर, जो कि मैं समझती हूं एक अपवाद था। लेकिन उस घटना के कारण अब मेरे अंदर एक शैतानी कीड़ा कुलबुलाने लगा था, शैतानी विचार सर उठाने लगा था कि साधारण तौर पर बिना किसी विरोध के प्रेममय आपसी सहमति से संभोग क्रिया की तुलना में यदि कोई मेरा बलात्कार करे तो शायद उसका रोमांच और मज़ा कुछ और होगा। बलात्कार करने वाला पूरी शिद्दत से मेरे साथ बलात्कार करे, उसे संतोष हो कि हां उसने जबरदस्ती मेरी इज्जत लूट ली और मैं उस दौरान रोती कलपती विरोध करती बलात्कार की शिकार होने का नाटक करती रहूं तो शायद उसका अलग ही लुत्फ होगा। हां यह और बात है कि मेरा बलात्कारी मेरी पसंद का हो।

खैर यह तो मेरे दिमाग में कुलबुलाते कीड़े की बात थी। फिलहाल तो मैं करीम चाचा के मुख से विभिन्न स्त्रियों के साथ हुए उनके शारीरिक संबंधों के बारे में सुन कर मज़े ले रही थी। “आप लोगों का कांटा तो चौथी औरत में ही अटका हुआ है। सब्जी वाली के बाद और कितने औरतों को अपना शिकार बनाए?” मैं पूछी।

“हां तो मैं बता रहा था कि सब्जी वाली के बाद नये शिकार की तलाश में थे। सौभाग्य से बहुत जल्दी दो और औरतें मिली। तेरे नानाजी के घर के पीछे जो घर बना है, जिसमें हम रहते हैं, उस घर के बनते समय कुछ मजदूर काम करने के लिए आते थे। उनमें दो औरतें भी थीं। एक करीब पैंतीस साल की थी और दूसरी करीब चालीस साल की। पैंतीस साल वाली सांवले रंग की करीब पांच फुट लंबी दुबली पतली चुलबुली औरत थी, छोटी छोटी चूचियां किसी 16 साल की लड़की की तरह, हां चूतड़ थोड़ा बड़ा था, नाम था कमला। चालीस साल वाली कोयले की तरह काली मगर भारी बदन वाली गठे शरीर की, भरी भरी बड़ी बड़ी चूचियां, बड़ा सा चूतड़, पांच फुट आठ इंच ऊंची, काली थी मगर देखते ही लंड खड़ा हो जाता था, नाम था उसका हीरा। इन दोनों औरतों को देख कर हम दोनों इन्हें चोदने का प्लान बनाने लगे। इनके साथ दो कुली और दो बूढ़े मिस्त्री भी काम करने आते थे। पीछे एक गोदाम था जिसमें सीमेंट राड वगैरह रखा जाता था। मिस्त्री लोग और एक कुली दोपहर को खाना खाने घर जाते थे क्योंकि उनका घर पास में ही था। दोनों रेजा और एक कुली खाना लेकर आते थे और यहीं गोदाम में खाना खाते थे। कमला थोड़ी हंसमुख स्वभाव की औरत थी और थोड़ी चालाक भी। हम उनसे मेल जोल बढ़ा कर पटाना चाहते थे। बातों ही बातों में हमें पता चला कि कमला का आदमी भी मजदूर है और पास के खदान में काम करता है। उसके दो बच्चे हैं। हीरा का आदमी रिक्शा चालक है और उसका कोई बच्चा नहीं है। कमला दो ही दिन में समझ गई कि हम किस किस्म के आदमी हैं। उसने हमारी नज़रों से ही समझ लिया था कि हम किस चक्कर में हैं। हम उनसे बात करते तो हमारी नजरें उनकी चूचियों और कमर से नीचे ही चिपकी रहती थीं।

हम लोग थोड़ा हंसी मजाक भी कर लेते थे। पानी वगैरह पीने के लिए वे लोग घर से ही मांग लेते थे। तीसरे दिन एक कुली जो यहीं खाना खाता था, तबीयत खराब होने के कारण नहीं आया। उस दिन दोपहर को खाना खाने के पहले कमला जब पानी लेने आई तो हरिया ने उसे अंदर बुलाया। हमने दरवाजा के अंदर चिकने फर्श पर थोड़ा तेल गिरा दिया था। जैसे ही उसने वहां पांव रखा वह फिसली और गिरने लगी। हरिया तो पहले से तैयार था, उसने उसे दोनों हाथों से पकड़ लिया लेकिन खुद भी संभल नहीं पाया क्योंकि उसका एक पैर फिसलन भरी फर्श पर पड़ा और कमला को लिए दिए फर्श पर गिर पड़ा। वह जानबूझकर ऐसे गिरा कि वह नीचे और कमला उसके ऊपर। हरिया सिर्फ लुंगी पहने हुए था। हरिया का लंड ठीक कमला की चूत पर टिक गया था। कमला उठने की कोशिश में दुबारा गिर पड़ी, इस बार ऐसा लगा जैसे हरिया के लंड का सुपाड़ा उसकी साड़ी समेत उसकी चूत में कुछ अंदर घुस गया हो।

कमला चिहुंक उठी, “हाय राम ई का?” कमला चौंककर बोली। हरिया को महसूस हुआ कि यहां के गांव देहात की औरतों की तरह कमला ने भी अंदर कुछ नहीं पहना है। बड़ी चालाकी से हरिया ने फर्श पर गिरे तेल से अपने लंड को लसेड़ कर उसे उठाने के बहाने नीचे हाथ डाला और खड़े होने की कोशिश की, इस कोशिश में वह भी जानबूझ कर दुबारा गिरा, मगर इस दुबारा गिरने के बहाने उसकी साड़ी उसकी कमर तक उठा दी और अपने लंड के ऊपर से लुंगी का पर्दा हटा दिया। इस बार वह उसी के ऊपर गिर पड़ा और ऐसा गिरा कि तेल से लिथड़ा उसके लंड का सुपाड़ा कमला की चूत के अंदर फच्च से घुस गया। यह संयोग नहीं था, हमारा पहले से बना बनाया प्लान था। कमला के मुंह से घुटी घुटी आह निकल गई।

“हाय दादा ई का? हटिए।” वह बोल पड़ी। उसका हाथ अनायास ही अपनी चूत की तरफ गया और यह महसूस कर कि हरिया का लंबा और मोटा सा लन्ड उसकी चूत में धंसा हुआ है, घबड़ा गई। लंड के साइज़ का अनुमान करके कांप उठी। भयानक दर्द हो रहा था जिसके कारण वह तड़प उठी थी। वह जितनी बार उठने की कोशिश करती है उतनी बार गिरती और उसी प्रकार हरिया जितनी बार उठने का उपक्रम करता उतनी बार जानबूझ कर गिर जाता और इस क्रम में हर बार थोड़ा थोड़ा करके पूरा लंड उसकी चूत में उतार दिया। कमला दर्द के मारे हलकान होती हुई रोने चिल्लाने लगी।

“हाय हाय मर जाएंगे, हाय राम हटिए हटिए फाड़ दिया मेरा बूर”

जब हरिया ने देखा कि पूरा लंड घुस गया है तो थोड़ा रुका और बोला, “हम का करें बोलो। उठना चाहते हैं तो गिर पड़ते हैं। तुम ही हटो ना ” उसने तो जीत का झंडा गाड़ दिया था।

“हाय दैय्य्य्याआ्आ्आ्आ हम कैसे हटेंगे, तेरा लंड मेरा बूर में फंसा हुआ है, ओह्ह्ह मर जाऊंगी, जल्दी निकालो न्न्न्न्न्ना” वह रो रही थी। चुदी चुदाई औरतों के लिए भी खौफनाक हरिया का लंबा और मोटा लंड सच में उस दुबली पतली औरत की छोटी सी चूत के लिए किसी क़यामत से कम नहीं था। उसकी चूत फैल कर हरिया के गधे जैसे लंबें और मोटे लंड से फंस कर चिपक गई थी।

हरिया करवट ले कर नीचे आ गया और कमला को अपने ऊपर करके बोला, “चल अब तू ही उठ जा” जबकि वह जानता था कि उसके लिए भी उठना आसान नहीं था। जितनी बार भी उठने की कोशिश करती, हरिया का लंड थोड़ा निकल जाता था लेकिन फिर जैसे ही वह फिसल कर गिरती, फिर घप्प से घुस जाता था।

वह दर्द से हाय हाय कर उठती थी, “हाय राम मार डाला रे बप्पा, फाड़ दिया मेरा बूर”। मगर इसी तरह कुछ ही देर में लंड अंदर बाहर होने से कमला की चूत थोड़ी ढीली हुई और दर्द की जगह अब उसे मज़ा आने लगा था। उसने उठने की कोशिश करना बंद कर दिया और थोड़ी शरमाते हुए हरिया के ऊपर लद गयी, एक प्रकार से अपने आप को हरिया के हवाले कर दिया। हरिया समझ गया कि अब कमला पूरी तरह उसके काबू में आ चुकी है। उसने लुंगी पूरा हटा दिया और धीरे-धीरे नीचे से धक्का लगाने लगा और इधर कमला भी शरमाते हुए अपनी कमर चलाने लगी थी। मैं दरवाजे के बाहर खड़े हो कर सारा नज़ारा देख रहा था।

जब मैं ने देखा कि अब तवा गरम है और दोनों मस्त हो कर चुदाई का मजा ले रहे हैं, उसी वक्त कबाब मैं हड्डी की तरह वहां पहुंच कर बोला, “यह क्या हो रहा है?”

मेरी आवाज़ सुनकर कमला तो हड़बड़ा गई मगर हरिया उसी तरह नीचे से कमला को चोदता रहा और बोला, “अरे कुछ नहीं भाई, हम फिसल कर गिर पड़े हैं, आकर हमें उठा लो।”

मेरे सामने कमला की चिकनी गांड़ खुली हुई मुझे निमंत्रण दे रही थी। मैं अपने लंड में पहले से तेल लगा कर सिर्फ लुंगी पहने हुए था, उन्हें उठाने के लिए आगे बढ़ा और उठाने के बहाने झुका और सामने से लुंगी हटा कर फिसलते हुए कमला के ऊपर गिर पड़ा। मेरा लंड ठीक कमला की गोल चिकनी गांड़ के सुराख पर था। मैं ने उठाने के बहाने कमला की चूचियों को पीछे से पकड़ कर दबाते हुए जोर लगाया और तेल से चुपड़े लंड का सुपाड़ा उसकी टाईट गांड़ में फच्च से घुसा दिया।

जैसे ही मेरा मोटा सुपाड़ा उसकी गांड़ में घुसा, कमला चीख पड़ी, “हाय रा्मर्र्र्र्र मेरा गां्ड़्ड्ड् फट्ट्ट गय्य्य्या”।

“अरे चिल्लाती क्यों है, उठा रहा हूं ना।” कहते हुए और जोर लगाया तो उसका गांड़ फैलाता हुआ मेरा आधा लंड उसकी गांड में घुसा दिया।

उसकी गांड़ का छेद फटने फटने को हो गया जिसमें कारण दर्द के मारे और जोर से चीख पड़ी, “आ्आ्आ्आ्आह फाड़ दिया रे मेरा गांड़” और रोने लगी।

मैं बोला, “अरे रोती क्यों है, उठा रहा हूं ना”। उठाने के बहाने और एक जोरदार धक्का लगाया और पूरा का पूरा लंड उसकी गांड़ में पेल दिया।

इस बार उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और उसकी सांस कुछ देर के लिए रुक गई, किसी हलाल होती हुई बकरी की तरह उसके मुंह से दर्दनाक आवाज निकल पड़ी। “हाय मां्म््म्म्््म््म्््म््म्म््म््म्््म््म्म्आह, मर जाएंगे, छोड़िए हमको, मेरा गां्ड़ फा्फा्ड़ दिया ओ्ओ्ओ्ओ्ओ्ओह्ह्ह्ह्ह्” मैं उसकी आवाज को अनसुना करते हुए धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा। धीरे धीरे उसकी गांड़ थोड़ी ढीली हो गई और दर्द जब खत्म हुआ तो उसे मज़ा आने लगा और शरमाते हुए वह भी क़मर चलाने लगी। अब नीचे से हरिया और ऊपर से मैं कमला को चोदने लगे। कमला की शर्म धीरे-धीरे खत्म होने लगी और आह उह करने लगी। हम लोगों ने किला फतह कर लिया था। अब मैं चोदता हुआ उसका ब्लाऊज़ खोल दिया और उसकी नींबू जैसी चूचियों को जोर जोर से दबाने लगा।

वह अब मस्ती में भर गई थी और बड़बड़ाने लगी थी, “आह राजा, ओह राजा, चोदिए जी, चोद लीजिए, आह मज़ा आ रहा है ओह्ह्ह आह्ह्ह्।”

हम दोनों अब पूरी तरह मस्त हो कर चोद रहे थे, “हां कमला, तेरी चूत बड़ी मस्त है,” हरिया बोला, “हां रानी तेरी गांड़ का जवाब नहीं, ऐसा गांड़ पहली बार चोदने को मिला है, आह साली कुतिया इसी के लिए इतना रोना गाना कर रही थी, साली रंडी,” मैं बोल पड़ा।

” हम सब समझती हूं, साले कुत्ते हरामी, हमको चोदने के लिए इतना ड्रामा किया था मादरचोदो, मगर आह्ह्ह्ह खूब मज़ा आ रहा है, आह मेरा बुर में लौड़ा धांस धांस के चोद, मेरा गांड़ में लंड ठोक ठोक के चोद आह्ह्ह्ह ओ्ह्ह्ह्ह मा्म्म्म्म्मां,” वह पागलों की तरह बड़ बड़ करती हुई मजे से चुदवा रही थी।

यह सब होते हुए करीब 15 मिनट हो चुका था, पानी लाने में देरी होने के कारण कमला को पुकारते हुए हीरा भी आ गई और खुले दरवाजे से उसने जो कुछ देखा तो सन्न रह गई। मुंह खुला का खुला रह गया। कमला आंखें बंद कर मस्ती में हम दोनों से खुल कर चुद रही थी और उसके मुंह से आनन्द के मारे सिसकारियां निकल रही थी।

कुछ देर हीरा बुत बनी हमें चुदाई में मग्न देखती रही, फिर अचानक जैसे नींद से जाग उठी और बोली, “हाय राम इहां ई का हो रहा है?”

हमारी मस्तीभरे चुदाई में बाधा, कमला हड़बड़ा गई, मगर हमने उसको छोड़ा नहीं और हीरा की ओर देख कर मैं बोला, “अरे हम गिर गये हैं, उठ नहीं पा रहे हैं, आकर जरा सहायता कर दो ना, वहां दरवाजा में खड़े खड़े क्या तमाशा देख रही है।” मैं जानता था कि वह जैसे ही आएगी, फिसल कर गिर पड़ेगी और हम उसका भी शिकार कर लेंगे। वैसा ही हुआ, जैसे ही उसने दरवाज़े के अंदर कदम रखा फिसली और सीधे हमारे ऊपर गिरने लगी। हरिया कमला को लिए दिए एक तरफ हो गया और मैं कमला को छोड़ कर पलट गया, मेरा लौड़ा कमला की टाईट गांड़ से फच्चाक से निकल कर हीरा के स्वागत में सर उठा कर खड़ा हो गया था। हीरा सीधे मेरे ऊपर आ गई। मैं इसके लिए पहले से तैयार था इसलिए हीरा को अपनी बाहों में सम्भाल लिया। मेरा टनटनाया लौड़ा साड़ी के ऊपर से ही सीधे हीरा की चूत से टकराया। मैं ने थोड़ा एडजस्ट कर के अपने कमर को हल्का सा धक्का दिया तो मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी साड़ी समेत उसकी चूत में थोड़ा सा धंस गया था। मैं समझ गया कि यह यहां की देहाती औरतों की तरह यह भी चड्डी वड्डी नहीं पहनी है। वह चौंक उठी, “हाय राम” उसका हाथ झट से अपनी चूत की तरफ गया तो मेरा तन्नाया हुआ लंड से टकरा गया। मेरे टनटनाए गर्म और मोटे लंड का अहसास कर तुरंत उठने की कोशिश करने लगी मगर फिर गिर पड़ी।

“अरे हट, तू हमें उठाने आई है कि हमारे ऊपर गिरने” कहते हुए मैं उसे उठाने के बहाने नीचे से हाथ लगाया और अनजान बनते हुए उसकी साड़ी को कमर तक उठा दिया मानो यह सब उसे उठाने की कोशिश में हुआ हो। कमर से नीचे अब वह पूरी तरह नंगी थी और मेरा गधा सरीखा लौड़ा उसकी काली काली फूली हुई झांट से भरी हुई चूत के दरवाजे पर दस्तक दे रहा था। वह हड़बड़ा गई और फिर उठने की कोशिश की लेकिन इस बार भी उसकी कोशिश सफल नहीं हुई और मेरे ऊपर गिर पड़ी। इस बार उसका गिरना उसके लिए क़यामत से कम नहीं था क्योंकि इस बार मैं ने अपने लौड़े को ठीक पोजीशन में रखा था, जैसे ही वह गिरी मेरा लौड़ा भच्च से उसकी भैंस जैसी बुर को फाड़ता हुआ सुपाड़ा समेत आधा अन्दर घुस गया। दर्द के मारे उसके मुंह से लंबी चीख निकल पड़ी, “आ्आ्आ्आ्आ्आआ्आ फट्ट्ट्टट््ट गया मेरा बू््ऊ्ऊऊ््ऊ्ऊर ओ्ओओ्ओ््ओ््ओ मा्मा्मां।”

मैं बनावटी झल्लाहट से बोला, “हट साली, खुद मेरे लौड़े पर गिर रही है और मां मां चिल्ला रही है।” वह जितनी कोशिश करती जा रही थी, मेरा लौड़ा धीरे धीरे उसकी बुर को फाड़ता हुआ घुसता चला जा रहा था।

अंततः मेरा पूरा लंड उसकी बुर के अंदर घुस गया और वह दर्द से बिलबिला उठी, “मईर देले गो, हाय रे फाईड़ देले हमर बूर के ( मार दिया मां, हाय फाड़ दिया मेरा बूर को)” चीख चीखकर रोने कलपने लगी।

“चुप साली हरामजादी, तू खुद मेरे लंड में गिर रही है और चिल्ला रही है, हट मेरे ऊपर से” मैं ने बनावटी गुस्से से डांटा। उसको भी लगने लगा कि यह एक एक्सीडेंट है, अतः फिर उठने की कोशिश करने लगी लेकिन असफल रही। जितनी बार कोशिश करती उतनी बार मेरा लौड़ा अंदर बाहर होता।

“हाय रे मोय आईज मोईर जाबों (हाय, मैं आज मर जाऊंगी)। माय रे बाप रे” चिल्ला चिल्ला कर रोने लगी थी। लेकिन यह कुछ ही देर की बात थी, फिर तो उसे भी मजा आने लगा और शरमाती हुई अपने आप कमर चलाने लगी। उसकी सिसकारियां निकलने लगी थी। अब मैं समझ गया कि अब खुल के चोदने का समय आ गया है।

मैं बोला, “अब क्या हुआ? अब काहे हटती नहीं है?”

वह शरमाती हुई कमर चलाती धीरे से बोली, “अच्छा लग रहा है अब”

“ओह तो यह बात है। सीधे बोल ना चुदवाने का मन हो गया है।” मैं बोला और उसको नीचे करके दोनों पैरों को फैलाकर घपाघप चोदना शुरू किया। वह अपने दोनों पैरों से मेरी कमर को जकड़ कर चुदाई का मजा लेने लगी, “आह राजा ओह बाबू खूब मज़ा आ रहा है जी, और जोर से चोदिए राजा, ओह ओह”

अब मैं पागल हो गया था, उसकी ब्लाऊज को खोल कर बड़े बड़े चूचियों को दबाने और मसलने लगा और धकाधक चोदने लगा। “साली रंडी इसी के लिए इतना नाटक कर रही थी हरामजादी कुतिया अभी देख कैसा मज़ा आ रहा है।” मैं बोल रहा था।

“हां राजा ओह सैंया, ओह चोदू, चोद हरामी चोद, साले कुत्ते हम सब समझते हैं, हमको चोदने के लिए ड्रामा किया मादरचोद, चोद हरामजादा, अपना मोटा लौड़ा से आह ओ्ओ्ओ्ओह” अब वह शर्मोहया को ताक में रखकर चुदने लगी थी।

उधर हरिया कमला को उलट पलट कर चोदने में लगा हुआ था। कमला भी खूब मज़ा ले रही थी। करीब आधे घंटे तक हमने उनको चोद चोद कर पगली कर दिया था और वो दोनों हमारे चुदाई की दिवानी हो गई थी। आधे घंटे बाद जब हम खलास हुए, तब तक तो वे दोनों हमारे लौड़ों की पुजारन बन चुकी थी। चुदाई के बाद जब हम उठे तो हीरा और कमला की हालत देखने लायक थी। उठने के लिए तेल वाले जगह से लुढ़क कर फर्श के भूखे भाग में गये। चुदने के बाद उनकी चूत फूल कर पावरोटी की तरह हो गई थी। खड़े हो कर ठीक से चल भी नहीं पा रहे थे। सबसे बुरी हालत कमला की थी। फिर भी कमला मुझसे बोली, “मेरा गांड़ आधा चोद कर छोड़ दिया ना”

“तू अभी रुक, पांच मिनट बाद तेरी गांड़ की चटनी बनाता हूं।” वह ना ना करती रही मगर मैं उसे उठा कर सोफे पर झुका कर कुतिया बना दिया और उसकी गांड़ चाटने लगा। कुछ ही देर में मेरा लौड़ा फिर खड़ा हो गया और वह भी मस्ती में आह ओह करने लगी। उसी समय उसके गांड़ में थूक लगा कर अपना लौड़ा पेल दिया। “हाय हाय” कर उठी वह। फिर तो पूरी कुतिया की तरह पन्द्रह मिनट तक चोदने के बाद ही उसे छोड़ा। इस दौरान हीरा और हरिया हमारी चुदाई के लिए तालियां बजाते रहे। कमला तो ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी।

उस दिन के बाद से जबतक घर का काम नहीं खत्म हुआ हम दोनों कमला और हीरा को रोज मौका निकाल निकाल कर अदल बदल के चोदने लगे। इसी दौरान पता चला कि हीरा गर्भवती हो गई है। लेकिन तब तक घर का काम भी तकरीबन खतम हो गया था। घर काम खत्म होने के बाद भी हम कमला को चोदने पहुंच जाते थे और पास के जंगल में ले जाकर चोद लेते थे। फिर काम के सिलसिले में कमला का आदमी कमला को लेकर अंडमान चला गया। इधर बच्चा होने के साल भर बाद हीरा एक दिन आई और बोली कि उसे हमारी बहुत याद आती है। हमने उसको बच्चा जो दिया था। वह हमारी अहसानमंद थी। हमारे लंड की दीवानी तो थी ही। हमारे अहसान के बदले उसने हमें कहा कि हम जब चाहें उसे चोद सकते हैं। हमें और क्या चाहिए था। । बच्चा होने के बाद उसकी चूचियों का साइज़ और बड़ा बड़ा हो गया था, दूध से थलथला कर भरा हुआ। उसी समय वहीं पर हम दोनों ने उसे पूरी नंगी करके उसके कोयले जैसे काले बदन को पूरे दो घंटे तक जम के चोदा, उसकी थलथलाती चूचियों को दबा दबा कर चूसा और दूध पिया, बुर चोदा, गांड़ चोदा, लंड चुसवाया। जी भर के मन मुताबिक मजा लिया। फिर धीरे धीरे हमारा मिलना कम हो गया। अभी तो वह भी करीब 55 साल की हो गई है, लेकिन अभी भी कभी कभी मिलते हैं तो उसको चोदने का अलग ही मजा मिलता है।”

इतना सुनते सुनते मैं इतनी उत्तेजित हो उठी थी कि बेसाख्ता बोल पड़ी, “बस बस, अभी इतना ही बताईए। मैं सुन कर बहुत गरम हो गई हूं। आप लोगों का लंड भी टनटना गया है। एक बार फिर से मुझे भी उन्हीं रेजा लोगों के जैसा समझ लीजिए और वही कीजिए जैसे उनके साथ किया था” मैं उत्तेजना के अतिरेक में पागल हो कर बोल उठी। मुझे क्या पता था कि इस तरह मैं ने दो वहशी जानवरों के अंदर के राक्षसों को जगा दिया है। फिर तो क़यामत आ गया। दोनों खुंखार दरिंदे मुझ पर टूट पड़े और करीम चाचा मेरी चूचियों को इतनी बुरी तरह मसलने लगे कि मैं चीख पड़ी। “आ्आ्आ्आ्ह्ह्ह्ह्, धीरे धीरे ओ्ओ्ओ्ओ्ओ्ह्ह्ह्ह, मार ही डालोगे क्या?” मैं तड़प उठी।

“चुप साली बुर चोदी रंडी, अभी तू हीरा है। अभी तेरी चूत का भोसड़ा बनाता हूं” कहता हुआ मुझे पलट दिया और टांगें फैला कर अपना मूसल लंड मेरी पनियायी बुर के मुहाने पर रख कर एक ही झटके में पूरा जड़ तक सर्र से पेल दिया। अचानक एक ही बार में पूरा लंड अन्दर घुसा तो एकबारगी उठे दर्द से बिलबिला उठी। “आह हरामी धीरे”

“बंद कर चिल्लाना हरामजादी कुतिया, तू अभी रेजा है। हरिया तू इसकी गांड़ का भुर्ता बना, आज साली बुर चोदी को सच का रंडी रेजा बना दे।” कहता हुआ बड़ी बेरहमी से मेरी चूत में भकाभक लंड ठोकने लगा। और करवट ले कर ख़ुद नीचे आ गया और मैं उसके ऊपर। मेरी गांड़ जैसे ही ऊपर हुई मेरा बाप अपना फनफनाता लौड़ा भच्च से एक ही करारे धक्के से पूरा का पूरा मेरी गांड़ में उतार दिया। एक ही बार में सड़ाक से जब उसका लंड मेरी गांड़ में घुसा तो मैं दर्द के मारे तड़प उठी। “हाय धीरे करो ना प्लीज”

” कुतिया अब बोलती है धीरे करो चूत मरानी अभी बोल रही थी रेजा जैसे चोदो, साली तू अभी रेजा है, अभी मैं तेरी गांड़ का भुर्ता बनाऊंगा, गांड़ का गूदा निकाल दूंगा रंडी कहीं की” बोलते हुए मेरा बाप मेरी गांड़ का कचूमर निकालने लगा।

मैं ने खुद उनके अंदर के जानवर को जगाया था इसलिए मुझे भुगतना ही था। दांत भींचे चुदती जा रही थी। मुझे ऐसा लग रहा था कि मानो मेरा बलात्कार हो रहा हो। धीरे धीरे मुझे इसमें अद्भुत आनंद का अनुभव होने लगा। “ओह आह चोद बेटी चोद, हरामी मादरचोद, कुत्ते, मुझे रंडी बना, कुतिया बना, आह ओह” मैं बोल रही थी। दोनों मुझे पैंतीस मिनट तक जंगली जानवरों की तरह नोचते खसोटते हुए भंभोड़ते रहे और उनकी हर हरकतों और गालियों से मुझे बेहद मज़ा आ रहा था। सबसे पहले मैं खलास हुई फिर करीम चाचा खलास होने वाले थे, अचानक ही उन्होंने अपना लौड़ा मेरी चूत से निकाल कर मेरे मुंह में ठूंस दिया और फचफचा कर मुझे अपना नमकीन और कसैला वीर्य पिलाने लगे और मैं हलक में उतारने को वाध्य हो गई। जैसे ही करीम चाचा हटे मेरे पापा भी अपना लौड़ा मेरी गांड़ से निकाल कर मेरे मुंह में घुसा दीए और फचफचा कर अपना मदन रस उंडेलने लगे। मैं उनका वीर्य भी पीने को वाध्य हो गई। उनके लंड से निकलने वाले एक एक कतरे को पीना पड़ा क्योंकि पूरे स्खलन के दौरान उनका लंड मेरे मुंह में अड़ा हुआ था।

अब हम थक कर चूर हो गये थे। “हां तो हमारी हीरा, हमारी कमला, हमारी रंडी रेजा, कैसा लगा रेजा बन के?” करीम चाचा पूछे।

“आह पूछिए मत, बहुत मजा आया। आप लोग सचमुच में बहुत हरामी और प्यारे जंगली कुत्ते हो। प्यारे चुदक्कड़ जंगली जानवर।” मैं बोली और उनके नंगे जिस्म से लिपट कर प्यार भरा चुम्बन दे बैठी।

वे दोनों पूर्ण संतुष्टि के भाव लिए मंद मंद मुस्कुरा रहे थे।

इसके बाद की घटना अगले भाग में।

कृपया अपना बहुमूल्य विचारों से अवगत कराते रहें।

आपकी रजनी

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Rajni4u

मैं एक 51 साल की विधवा शिक्षिका हूँ। मैं कामोत्तेजक कहानियां पढ़ना, दोस्ती करना और दोस्तों से किसी भी प्रकार की चैटिंग करना पसंद करती हूं। मेरी रुचि संगीत में भी है। फिलहाल मैं अपनी कामुक भावनाओं को कहानियों के माध्यम से लोगों के सम्मुख प्रस्तुत करने का प्रयास कर रही हूं।