कामिनी की कामुक गाथा (भाग 9)

पिछली कड़ी में अपने पढ़ा कि नानाजी का नौकर हरि, न सिर्फ उनका नौकर था बल्कि मेरा जैविक पिता भी था। मेरी मां और हरि के शारीरिक संबंधों का नतीजा थी मैं। नौकर हरि अर्थात मेरे वास्तविक पिता ने जानते बूझते, कि मैं उनकी अपनी सगी बेटी हूं, मुझे अपनी हवस का शिकार बनाया। मैं खुद पर भी चकित थी कि इतनी बड़ी बात पता लगने के बावजूद मेरे अंदर कोई खास अपराधबोध नहीं था, बल्कि इसके उलट मुझे एक नये रोमांच का अहसास हो रहा था। अपने बाप के विशाल व अद्भुत लंड से आरंभिक पीड़ा के पश्चात संभोग का जो आनंद मैं ने प्राप्त किया वह अवर्णनीय था। मेरे बाप द्वारा बेशर्मी भरी कामलीला के बाद इस रहस्योद्घाटन के दौरान, कि मैं उनकी सगी बेटी हूं, उनके चेहरे पर लेशमात्र भी अपराधबोध नहीं था और न ही लज्जा, बल्कि इसके विपरीत एक खेले खाए वासना के पुजारी औरतखोर की तरह चोद कर तृप्त मुस्कान खेल रही थी। फिर उनकी जिंदगी में अबतक किस तरह एक एक करके नारियां उनकी कामुकतापूर्ण रासलीला में स्वेच्छा अथवा जोर जबरदस्ती से भगीदार होती गईं, इसका खुलासा उन्होंने मेरे सामने करना शुरू किया। मेरी मां, नानी, कामवाली बाई और सब्जी वाली औरत, इन सबसे किस तरह उनका शारीरिक संबंध स्थापित हुआ, इसका वर्णन उन्होंने किया और साथ ही ड्राईवर करीम किस तरह उनके इस खेल में शामिल हुआ इसका भी खुलासा किया। जितनी देर उन्होंने उपरोक्त चार स्त्रियों के साथ की गयी विभिन्न मुद्राओं में की गई उत्तेजक कामलीला का विस्तृत वर्णन किया, उस दौरान धधक उठती उत्तेजना के आवेग में हर घटनाओं के बीच विराम ले ले कर हम कलयुगी बाप बेटी ने रिश्तों की मर्यादा को शर्मशार करते हुए तीन बार और वासना के समुद्र में डुबकी लगा लगा कर नंगा खेल खेला।

अब आगे की घटनाओं का वर्णन सुनिए।

रात करीब 8:30 बजे नानाजी, दादाजी और बड़े दादाजी बाजार से वापस आए। उस समय तक मैंने और मेरे बाप ने अपना अपना हुलिया ठीक कर चुके थे। दोनों ही अपने अपने हवस की प्यास अच्छी तरह बुझा चुके थे। हालांकि इस दौरान की धमाचौकड़ी, गुत्थमगुत्थी और धींगामुश्ती में हम बुरी तरह थक गये थे मगर नहा धो कर काफी हद तक सामान्य दिख रहे थे।

“कैसी हो बिटिया? ठीक से आराम की ना?” नानाजी ने पूछा।

“हां नानाजी, खूब बढ़िया से आराम की” अपने चोदू बाप को आंख मारते हुए मुस्कुरा कर बोली।

पापा भी मुस्कुराहट छिपाते हुए किचन के अंदर गये। इतने में मेरा मोबाइल बज उठा। यह मम्मी का कॉल था। वह पूछ रही थी कि हम ठीक ठाक पहुंचे कि नहीं। मैं ने बताया कि हम ठीक ठाक पहुंच गए हैं। मेरे और मम्मी के बीच हो रही इस वार्तालाप को सभी सुन रहे थे और सबके चेहरे काले पड़ गये थे, मगर मैं सहज भाव से बातें कर रही थी। अब मैं क्या बताती कि बस में उनकी बेटी के साथ पांच पांच बूढ़ों ने क्या क्या कुकर्म किया, और अभी अभी तीन घंटों के अंदर उनके आशिक हरिया ने (मेरे बाप ने) उनकी बेटी के साथ नाजायज संबंध बनाते हुए तीन तीन बार वासना का नंगा खेल खेलकर मनमाने ढंग से अपनी हवस मिटाई और मुझे छिनाल बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा। यह अलग बात है कि मैं भी इस खेल में स्वेच्छा और पूर्ण समर्पण के साथ बराबर की हिस्सेदार रही और हर एक पल का लुत्फ लेती हुई अपने ही बाप के अद्भुत लंड और उनकी चुदाई की दीवानी हो गई।

अभी मैं मम्मी से बात कर ही रही थी कि और किसी का कॉल आने लगा। मैं ने मम्मी को बाय किया और देखा कि यह सरदारजी का कॉल था। मैं धक् से रह गई। समय देखा तो रात के 9 बज रहे थे।

“हैलो” मैं ने कॉल उठाया।

“हैल्लो मेरी छमिया, क्या हाल है?” उधर से सरदारजी की आवाज आई।

“क्या हुआ बोलिए सरदारजी, कैसे याद किया?” मैं खीझ कर बोली।

“बस तेरी मदमस्त चूत की याद आ रही थी इसलिए याद किया मेरी जान, अभी आ सकती हो तो मेरे घर में आ जाओ, तेरी बहुत याद आ रही है रानी।” बड़े घटिया तरीके से बात कर रहा था।

मुझे गुस्सा तो बहुत आ रहा था मगर गुस्से को बमुश्किल काबू में कर के बोली, “नही, मैं अभी इतनी रात में नहीं आ सकती सरदारजी”

“क्या कहा, मुझे ना कहती है कुतिया। तेरा वीडियो अपलोड करूं क्या?” सरदार जी फुंफकार उठे।

मेरा भेजा घूम गया। बड़ी मुश्किल से अपने गुस्से को काबू में कर के बोली, “ठीक है सरदारजी आती हूं, मगर जल्दी छोड़ दीजियेगा,”

“अरे मेरी रानी, एक घंटे में छोड़ दूंगा।”

“फिर ठीक है, अपने घर का पता बताईए।” मैं बोली।

“तू लालपुर चौक आ जा, मैं वहीं मिलूंगा।”

“ठीक है, आ रही हूं,” कहकर मैंने फोन काट दिया। फिर मैंने उन बूढ़े आशिकों से कहा “मैं एक घंटे में उस सरदारजी को निपटा कर आती हूं” फिर मैंने हरी पापा को आवाज दी, “चाचा जी चलिए जरा सरदारजी को निपटा कर आते हैं।”

फिर मैं अपने बाप को साथ ले कर नानाजी के कार से ही निकल पड़ी। तीनों बूढ़े असहाय भाव से मुझे देखते रह गए। करीम ड्राईवर ही कार ड्राइव कर रहा था। मैं पीछे की सीट पर पापा के साथ बैठी थी। मैं ने उनको समझा दिया कि सरदारजी के घर के बाहर मेरा इंतजार करें। जैसे ही कार स्टार्ट हुआ, पापा ने मुझे कमर से पकड़ कर अपनी ओर खींच कर सटा लिया। बांया हाथ मेरी कमर पर था और दाहिने हाथ से मेरी चूचियों पर हाथ साफ करने लगा। फिर जैसे ही मुझे चूमने को था, मैं ने उन्हें आंख दिखाई।

रीयर व्यू आइने में करीम चाचा ने हमारी हरकतों को देख लिया और बोला, “यह क्या हो रहा है हरिया? साले अकेले अकेले?”

पापा हड़बड़ा गये। “अरे कुछ नहीं भाई”।

“क्या कुछ नहीं साले। मुझे उल्लू समझा है? हमने सब कुछ देख लिया है। लगता है तूने अकेले अकेले इस पर हाथ साफ कर लिया है। मुझे भूल गए क्या साले हरामी? याद है ना, आजतक हम मिल बांट कर खाए हैं। हां तो कम्मो बिटिया, हम पर भी थोड़ी मेहरबानी कर देना, नहीं तो मालिक को सब बता दूंगा।” वह बोला।

मैं घबराकर बोली, “नहीं करीम चाचा, प्लीज घर में किसी को कुछ मत बताइएगा। मैं आपकी ख्वाहिश पूरी करने को तैयार हूं।”

मुझे पापा पर गुस्सा आ रहा था, “न जगह देखा न माहौल देखा, बस शुरू हो गये।” मैं ने पापा को डांटा। पापा खिसिया कर मुझ पर से हाथ हटा लिए। करीम चाचा को इस बात का ज़रा भी आभास नहीं था कि हरी मेरा सगा बाप है। पता नहीं इस प्रकार के अनैतिक रिश्ते के बारे में जानकर उनकी प्रतिक्रिया क्या होती।

खैर मैंने बात को दूसरी ओर मोड़ दिया और कहा, “देखिए फिलहाल तो हम उस सरदारजी से निपट लें, उसके बाद आपको जो करना है कर लीजिएगा।”

“ठीक है, तो अभी सरदारजी से निपटने के लिए तुम्हारा प्लान क्या है?” पापा ने पूछा।

” उसकी टेंशन आप लोग मत लीजिए। आप लोग केवल बाहर मेरा इंतजार कीजियेगा। मुझे उससे वह वीडियो हासिल करना है बस। जरूरत पड़ी तो बुला लूंगी। जैसे ही मेरा काम हो जाएगा, मैं आ जाऊंगी। फिर हम वापस लौट चलेंगे,” मैं ने पूरे आत्मविश्वास से कहा।

करीब 15 मिनट में हम लालपुर चौक पहुंचे। चौक के पास एक पेट्रोल पंप के पास ही सरदारजी खड़े थे। मैं ने करीम चाचा को थोड़ा किनारे कर के कार खड़ी करने को कहा और कार से उतर कर सरदारजी के पास गयी। जैसे ही उसने मुझे देखा, उसकी बांछें खिल गईं। वे झक्क सफेद रेशमी चूड़ीदार पाजामा और कुर्ता में थे। लाल पगड़ी में खूब फब रहे थे।

“गुड ईवनिंग सरदारजी” मैं पास पहुंच कर बोली।

“गुड, तुम बिल्कुल समय पर आ गई हो। चलो यहीं सामने मेरा घर है।” वे प्रसन्नता से बोले।

मैं ने सामने एक आलिशान बंगला देखा, जिसका गेट खुला था। गेट पर कोई पहरेदार नहीं था। मैं सरदारजी के पीछे पीछे गेट के अंदर आई तो सरदारजी ने गेट बंद कर सिटकनी लगा दिया लेकिन ताला नहीं लगाया। उस सुनसान आलिशान बंगले में लाईट जल रही थी जिसका मुख्य द्वार बंद था किन्तु सिर्फ उढ़का हुआ था। सामने बरामदा था जिसे पार कर के मुख्य द्वार तक आए। ढकेलने से ही दरवाजा खुल गया और हम ड्राइंग रूम में आये। ड्राइंग रूम में पहले से एक काला कलूटा भीमकाय हब्शी बैठा हुआ था। करीब 50 – 55 की उम्र का। लाल लाल होंठ बाहर की ओर निकले हुए थे, गोल चेहरा, सर पर अधपके घुंघराले बाल, नशे से बोझिल आंखों को बड़ा बड़ा करके मुझे वहशी अंदाज में देखने लगा। टेबल पर विदेशी दारू की आधी खाली बोतल और दो ग्लास आधी खाली थी और सामने एक प्लेट पर काजू और बादाम रखा हुआ था। इसका मतलब ये लोग पहले से पी रहे थे।

” Come gurpreet, oh so this the girl. So young? She will die if I will fuck her. (आओ गुरप्रीत, ओह तो यह है लौंडिया। इतनी कम उमर की? इसको चोदेंगे तो यह तो मर ही जाएगी।)” उस दैत्य ने अंग्रेजी में कहा, शायद उसे हिंदी बोलना नहीं आता था।

“डोंट वरी सर, इसे कुछ नहीं होगा। मैं जानता हूं। आप आराम से जैसे मर्जी चोद सकते हैं।” सरदार बोला। उसका boss हिंदी समझता था।

उनकी बातें सुन कर पहले तो घबराई, मगर फिर संभल कर बोली, “यह क्या सरदारजी, आप तो रंडी की तरह किसी के सामने भी मुझे परोसे दे रहे हैं।”

“चुपचाप मेरे boss को खुश कर दे, नखरे न कर। सर चलिए इसे बेडरूम में ले कर चलते हैं।” सरदार बोला।

“नहीं, आप ये ग़लत कर रहे हैं। आपके पास मेरा वीडियो है तो इसका मतलब आप किसी से भी मुझे चुदवा लीजिएगा?” मैं ने विरोध किया।

“चुप साली रंडी, चुपचाप चल बेडरूम में।” गाली देता हुआ मेरा हाथ पकड़ा और बड़े से बेडरूम में ले आया।

मैं सोच रही थी कि अगर सरदार अकेला होता तो आराम से उसका मोबाइल छीन लेती और वीडियो डिलीट कर देती, मगर यहां तो दो दो पहलवान मौजूद थे। मैं ने फिलहाल चुपचाप उसकी बात ली, फिर भी मैं उपयुक्त मौके की ताक में थी। मैं थोड़ी घबराई हुई थी, उस लंबे चौड़े भैंस जैसे पहलवान टाईप हब्शी को कैसे झेल पाऊंगी। जब वह खड़ा हुआ तो देखा, उसका कद करीब करीब छः फुट नौ इंच के करीब रहा होगा। हमारे पीछे पीछे वह हब्शी भी झूमता हुआ अंदर आया और सरदार को बोला, ” Now you stay outside till i am fucking her. (अब तुम बाहर रुको जब तक मैं इसे चोद रहा हूं।) Come baby, lets have fun. (आओ बेबी हम मजा करें)।”

सरदार आज्ञाकारी नौकर की तरह चुपचाप बाहर निकल गया। उसका boss मेरे पास आया और मुझे अपनी मजबूत बाहों में भर कर चूमने लगा। मैं 5 फुट 8 इंच कद की होती हुई भी उसके सामने बच्ची लग रही थी। मैं ने कोई विरोध नहीं किया और उसकी बांहों में बंधी उससे सहयोग करने लगी। वह मेरे कपड़े उतारने लगा। मेरे तन से पूरा कपड़ा उतार कर नंगी कर दिया और आंखें फाड़कर मेरी मदमस्त जवानी का दीदार करने लगा। (oh so beautiful and sexy) ” ओह इतनी सुन्दर और सेक्सी।” मैं चाहती थी कि जल्दी इसे निपटा कर फारिग हो जाऊं और सरदार की खबर लूं। मैं खुद ही बेशरम हो कर उस हब्शी के पैंट शर्ट को उतारने लगी। ज्यों ही उसका पैंट खुला मैं उसकी चड्डी देख कर दंग रह गयी। चड्डी सामने से फूल कर विशाल लंड की चुगली कर रहा था। डरते हुए जैसे ही उसकी चड्डी नीचे की, भयानक काला और मोटा करीब चार इंच और लंबा करीब दस इंच का लौड़ा उछल कर मेरे सामने आ गया। मैं घबराकर एक कदम पीछे हट गई।

इससे पहले कि मैं उस हौलनाक दृश्य के सदमे से उबर पाती, हब्शी ने ने मुझे गोद में उठा लिया और बेड पर लिटा कर पागलों की तरह मुझ पर टूट पड़ा। बड़ी बेरहमी से मुझे चूमना चाटना, मेरी चूचियों को मसलना और चूसना शुरू कर दिया। डर और घबराहट के बावजूद उसकी उत्तेजक हरकतों से मैं भी उत्तेजित हो गई और, “ओह आह इस्स्स इस्स्स” करने लगी। मेरी चूत पनिया उठी थी।

अब उसका ध्यान मेरी चुद चुद कर फूली हुई पनियाई चूत की ओर गया। उसकी खुशी मैं स्पष्ट देख रही थी। वह भी समझ गया कि मै बिल्कुल तैयार माल हूं। मुझे चोदने में उसे कोई समस्या नहीं होगी। वह पहले अपने लंबे और मोटे जीभ से मेरी चूत चाटना शुरू किया। मैं बेहद चुदासी के आलम में पूरा पैर फैला कर छटपटाती हूई अपनी कमर नीचे से उछालने लगी और उत्तेजना के मारे मेरी सिसकारियां निकलने लगीं। बिना यह सोचे कि उसके विशाल लंड से चुदने से मेरी चूत का क्या हाल होगा मैं बड़बड़ाने लगी, “अब चोद भी लीजिए सर, और मत तड़पाईए।” इस्स्स इस्स्स करने लगी।

“Yes my bitch, now I’m going to fuck your nice cunt, get ready” (हां मेरी कुतिया, अब मैं तेरी सुंदर चूत को चोदने जा रहा हूं, तैयार हो जाओ।) उस हब्शी ने जब मेरा यह हाल देखा तो मेरे दोनों पैरों को फैला कर उठाया और अपने कंधे पर रख लिया और अपना गधे सरीखे विशाल लौड़े का सुपाड़ा मेरी चूत के मुहाने पर रख कर रगड़ना शुरू किया और बोला।

“हां अब चोद भी डालिए सर”, मैं बेताबी से बोली।

उस ने मेरी कमर को कस के पकड़ा और धीरे धीरे मेरी चूत में डालने लगा। “yes take it” (हां ले ले) उसका विशाल सुपाड़ा जब मेरी चूत को फैलाता हुआ अन्दर जाने लगा तो ऐसा लग रहा था कि मेरी चूत फट जायेगी।

मैं चीख पड़ी। “ओ्ओ्ओ्ओह धीरे धीरे सरजी, मेरी चूत फट रही है, अम्म्म्म्म्माआआआआ”। उसने धीरे धीरे दबाव बढ़ाते हुए पूरा 10” मेरी चूत में भोंक दिया। सरसराते हुए उसका लंड जब घुस रहा था तो ऐसा लग रहा था कि मेरी चूत अपनी सीमा से बाहर फैलता जा रहा हो और फटने के कागार पर पहुंच गया हो। उसका भीमकाय लंड मेरी चूत की दीवारों को बुरी तरह रगड़ता जा रहा था और मुझे ऐसा लग रहा था मानो उसका घुसना अंतहीन हो। मेरे गर्भाशय के अंदर तक घुसता चला जा रहा था। घुसाने के बाद फिर धीरे धीरे बाहर करने लगा, उसी तरह चूत की दीवारों को रगड़ता हुआ। तीन चार बार धीरे धीरे अंदर बाहर करने के बाद दर्द कहां गायब हुआ पताही नहीं चला। चूत की दीवारों पर उसके मोटे और लम्बे लंड का घर्षण इतना आनंद दायक था कि बयां करना मुश्किल था। अब मैं जोश में आ गयी थी और अपनी चूतड़ उछालने लगी थी। धीरे धीरे चोदने की रफ़्तार बढ़ाता गया।

मैं आनन्द विभोर हो रही थी, “हां सरजी, आ्आ्आह ओ्ओ्ओ्ओह, बहुत मजा आ रहा है राजा”।

“Yes dear, oh my bitch, nice pussy, tight pussy, ah fucking hole, oh my whore” (हां डियर, ओह मेरी कुतिया, टाईट चूत, चुदाई की छेद, ओह मेरी रंडी) बोलते हुए चोदे जा रहा था। ऐसा लग रहा था मानो कोई भैंस किसी बछिया को चोद रहा हो। मैं खुद चकित थी कि इस दानव जैसे व्यक्ति के दानवी लन्ड से चुदती हुई कैसे इतनी आनंदविभोर हो रही थी? जब उन्होंने देखा कि मैं भी मस्ती में डूब कर चदाई का पूरा लुत्फ ले रही हूं, तब उन्होंने चुदाई का आसन बदला, मेरे पैरों को अपनी कमर पर लपेट लिया और मुझे अपनी गोद में उठा लिया, मेरी गांड़ के नीचे अपने दोनों मजबूत हाथों का सहारा दिया और खड़े खड़े चोदने लगा। मैं उसकी गर्दन पर अपनी बाहों को लपेटे हवा में झूलती हुई बड़े आराम से चुद रही थी। मेरी चूत में उनका फनफनाता भीमकाय लंड नीचे से सर्र सर्र किसी इंजन के पिस्टन की तरह फच्चाफच अंदर बाहर हो रहा था। मैं उनके बदन से किसी छिपकली की तरह चिपकी हुई चुदाई के इस अद्भुत आनंदमय अनुभव से गुजर रही थी इसी बीच उस हब्शी ने सरदार को आवाज लगाई। सरदार तुरंत दरवाजा खोल कर अंदर आया और अंदर की गरमागरम कामलीला देख कर मुस्कुरा उठा।

“यस सर” किसी आज्ञाकारी कुत्ते की तरह बोला।

“Bring one more peg” (एक पैग और लाओ) उन्होंने कहा।

“नहीं, एक नहीं, बोतल में बची सारी ले आओ और ग्लास भी” मैं मस्ती के आलम में चुदती हुई बोली। मैं चुदने के आनंद में डूबी जरूर थी मगर अपना उद्देश्य नहीं भूली थी।

” Ok, bring the bottle and glass as this sweety said” (ठीक है बोतल और ग्लास ले आओ जैसे ये स्वीटी बोली) उन्होंने कहा।

सरदार ने तुरंत वैसा ही किया, बोतल, पानी और ग्लास बेड के साईड वाले टेबल पर रखा और बाहर चला गया।

हब्शी उसी अवस्था में मुझे लिए दिए एक पैग चढ़ाया तो मैं ने दूसरे पैग के लिए उकसाया, “एक पैग और लीजिए ना”।

उसने दूसरा पैग भी चढ़ा लिया। दो पैग ले लेने के बाद वह और आक्रामक ढंग से पूरी रफ्तार के साथ चुदाई में मशगूल हो गया। मैं ने महसूस किया कि अब वह कुछ ही देर में खल्लास होने वाला है क्योंकि उसका लंड थोड़ा और फूल गया था और चुदाई के चर्मोत्कर्ष का भाव उसके चेहरे पर स्पष्ट देख रही थी। मैं भी चरम आनंद से कुछ ही पल दूर थी। फिर क्या था, उन्होंने मुझे अपने से इतने कस के चिपका लिया मानो मेरी जान ही निकल जाएगी और मेरी कोख में ज्वालामुखी का लावा उगलना शुरू कर दिया। “yessssss im cumming my bitch ooooooh sweet darling” (हां मैं झड़ रहा हूं मेरी कुतिया ओह प्यारी) उसके मुंह से बोल उबल पड़े। “आआ्आ्आह मैं भी गयी राज्ज्ज्जाओ्ओ्ओ्ओह्ह्ह्हह” अद्भुत था वह स्खलन। मैं भी स्खलन के उस आनंदमय पलों में अपनी चूत से उनके लंड को दबोच कर उससे निकलते वीर्य के हर कतरे को तबतक चूसती रही जब तक वह पूरी तरह खल्लास हो कर किसी भैंसे की तरह डकारते हुए लुढ़क नहीं गया।

“Oh sweet little fucking bitch, nice body, nice cunt. Entirely enjoyed fucking you.” (ओह प्यारी छोटी सी चुदक्कड़ कुतिया, सुन्दर तन, सुन्दर चूत। तुम्हे चोद कर पूरा मजा आया।” वह बोल पड़ा।

“मुझे भी बड़ा मजा आया राजा। आज से पहले किसी ने मुझे ऐसा नहीं चोदा था। आई लव यू टू।” मैं भी बोली।

मैं भी पूरी तरह तृप्त हो कर कुछ देर के लिए निढाल हो गई थी मगर फिर मैंने अपना होश संभाला और मनुहार करके प्यार से उस हब्शी को तीन पैग और पिला दिया। जब वह पूरी तरह नशे में टुन्न हो गया तो मैं उठी और कपड़े पहन कर कमरे से बाहर आई। सामने सरदार सोफे पर बैठा बेकरारी से इंतजार करता मिला।

बड़ी बेशर्मी से मुस्कुराते हुए बोला, “अरे तूने इतनी जल्दी कपड़े क्यों पहन लिया लौंडिया, साहब को खुश कर दिया ना? अब चल मुझे खुश कर दे। चल फिर से उतार कपड़े, या मैं खुद उतारूं।”

“नहीं, पहले आप मेरा वीडियो डिलीट कीजिए” मैं बोली।

“ठीक है मैं डिलीट कर दूंगा, मगर तुझे चोदने के बाद।” वह धूर्तता पूर्वक मुस्कुराते हुए बोला।

“ठीक है, मगर आप पहले वादा कीजिए।” मैं बोली।

“चल मैंने वादा किया, अब तू जल्दी अपने कपड़े उतार और मुझे चोदने दे।” उसने बड़ी बेताबी से कहा।

मैं मजबूरी में फिर से कपड़े उतार कर नंगी हो गई, मगर इस बार चुदने के लिए नहीं बल्कि सरदार के कब्जे से मोबाइल हथियाने के लिए। मेरे नग्न जिस्म को भूखी नजरों से देखते हुए बोला, “अहा मेरी जान, तू सच में बड़ी धांसू माल है। मां कसम, आज तुझे चोद चोद कर सारी कसर निकालूंगा।”

“सरदारजी, पहले अपने कपड़े तो उतारिए। देखिए तो आपका पैजामा फटने को हो रहा है।” मैं उसके लंड की तरफ इशारा करते हुए बेशर्मी से बोलीं।

“हा हा हा हा, हां री कुतिया, तुझे चोदने के लिए मेरा लौड़ा अब से फनफना रहा है। अभी उतारता हूं,” कहते हुए कपड़े खोलने लगा। जैसे ही वह नंगा हुआ, उसका गधा सरीखा लौड़ा उछल उठा और बंदूक की तरह तन गया।

“देख मेरा लौड़ा तेरी चूत में घुसने को कितना बेकरार है,” कहता हुआ नंग धड़ंग वह मेरी ओर बढ़ा और जैसे ही मुझे बांहों में लेने को हुआ, मैं फुर्ती से झुकाई दे कर उसके कुर्ते की ओर झपटी और पलक झपकते उसका मोबाइल मेरे कब्जे में था।

“अब बोल कमीने।” मैं फुंफकार उठी। सरदार फिर भी बाज नहीं आया। “साली कुतिया, चुपचाप मोबाइल मेरे हवाले कर वरना मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।” गुर्रा कर बोलते हुए मेरी ओर बढ़ा ही था कि मेरा एक भरपूर किक उसके पेट पर पड़ा। प्रहार इतना जबरदस्त था कि वह आह करता हुआ पेट पकड़कर दोहरा हो गया। अत्यधिक पीड़ा से उसका चेहरा विकृत हो गया। शैतानी, ढिठाई, धूर्तता की जगह उसके चेहरे पर आश्चर्य और अविश्वास का भाव था। मेरी आंखों में उसने जाने क्या देखा कि सहम सा गया। मैं ने क्रोध के आवेश में एक जबरदस्त मुक्का उसके जबड़े पर जड़ दिया। फिर तो उसे सम्भलने का मौका ही नहीं दिया और जी भर के लात घूंसों की बरसात कर बेदम कर दिया। मैं ने उसे अच्छी तरह से ठुकाई करके अपने मन की भंड़ास निकाली। “भड़वे साले हरामी, हराम का माल समझ रखा है। ब्लैकमेल करके दलाली करने का इतना ही शौक है तो जा के अपनी मां बहन और बेटी की दलाली कर मादरचोद। ले मैं वीडियो डिलीट कर रही हूं, दम है तो उठ और रोक कर दिखा।” वह कराहता हुआ फर्श पर पड़े असहाय भाव से मुझे वीडियो डिलीट करते देखता रहा।

फिर मैं मैं उसकी ओर मुखातिब हो कर खूंखार नजरों से घूरती हुई पूछी, “और कहीं वीडियो सेव किया है तो वह भी जल्दी बता दे वरना इससे भी बुरा हाल करूंगी।”

“और कहीं नहीं है मेरी मां, मुझे माफ़ कर दे,” वह बड़ी बेचारगी से बोला।

मैं ने उसके चेहरे को पढ़ा और आश्वस्त हुई कि वह झूठ नहीं बोल रहा है फिर भी कोई गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती थी। मैंने देखा कि यह सब करते हुए करीब 45 मिनट लगा। मैं दौड़ कर बाहर निकली और करीम चाचा और पापा को अंदर बुलाया। उन्होंने आकर अंदर का जो नजारा देखा तो देखते रह गए। बाहर अंधेरे में उन्होंने मुझे ठीक से देखा नहीं मगर अंदर रोशनी में मुझ मादरजात नंगी साक्षात चंडी रूप को आंखें फाड़कर अपलक देखते रह गए। मेरे पापा मेरे नग्न शरीर का भोग लगा चुकने के बावजूद इस नए रूप को एक टक निहार रहे थे। करीम चाचा की भूखी नज़रें तो मेरे नग्न जिस्म से ही चिपक गईं थीं। आंखें फाड़कर कभी मेरे नग्न दपदपाते कामुक शरीर को और कभी मेरे कहर बरसाते चेहरे को और कभी उधर पिट पिट कर बेहाल फर्श पर पड़े कराह रहे नंग भुजंग सरदार को देख रहे थे।

“अब आपलोग देखते मत रहिए, घर की पूरी तलाशी लीजिए, कंप्यूटर, लैपटॉप, सीडी, सब कुछ। पूरी कहानी मैं बाद में बताऊंगी।” मैं बोली। सरदार कराहता हुआ बोला, “अरे मैं बोल रहा हूं, और कहीं कुछ नहीं है।”

मैं ने गौर से उसके चेहरे को देखा और समझ लिया कि वह सच कह रहा है, फिर भी उसे धमकाते हुए कहा, “अभी तो मैं छोड़ रही हूं, साले हरामी, अगर फिर कभी ऐसी हरकत की तो कसम से मैं तुम्हें ज़िंदा नहीं छोड़ूंगी।” मेरी धमकी से वह गिड़गिड़ा कर माफ़ी मांगते हुए बोला, “और कहीं नहीं है मेरी मां। अब और आगे से फिर कभी ऐसी हरकत नहीं करूंगा। मुझे बख्श दो, मैं तेरे पांव पकड़ता हूं।”

“ठीक है, ठीक है, जा माफ किया।” कहते हुए उसके बेडरूम में गयी और हब्शी के मोबाइल से उसका नंबर लिया, वह बेसुध सोया पड़ा था। फिर सरदार का नंगा फोटो खींच कर उसे कहा, “देख कमीने, तेरा नंगा फोटो मेरे पास है। फिर कभी मुझ से पंगा मत लेना।” फिर मैंने पापा और करीम चाचा से कहा, “अब चलिए हमारा काम हो चुका है,” कहते हुए दरवाजे की ओर कदम बढ़ाई कि पापा ने टोका, “अरे पहले कपड़े तो पहन ले, ऐसी ही नंगी चलने का इरादा है क्या?”

अब मुझे होश आया कि मैं अबतक इनके सामने नंगी ही थी। शर्म और खीझ के मारे मैं ने सरदार को एक और लात जमा दिया, “इस हरामी की वजह से मैं होशो-हवास खो बैठी थी” फिर कपड़े पहन कर उनके साथ बाहर निकल पड़ी। कार से हम करीब 15 मिनट में घर पहुंचे। रास्ते में मैं ने उन्हें संक्षेप में सारी घटना बताती रही।

करीम चाचा ने मुझे याद दिलाया कि मैं ने आते वक्त क्या वादा किया था, “बिटिया, तूने मुझ पर मेहरबानी करने का वादा किया था, याद है ना?”

“हां बाबा हां, मुझे सब याद है, भूली नहीं हूं मैं। मगर आज नहीं, आज मैं बहुत थकी हुई हूं। कल जो मर्जी कर लीजिएगा।” मैं बोली। एक घंटे पन्द्रह मिनट के बाद फिर से हम नानाजी के घर के अंदर थे। घर में सब बड़ी बेकरारी से हमारा इंतजार कर रहे थे। जैसे ही हम घर के अंदर घुसे, सबने सवालों की झड़ी लगा दी। मैं ने पूरी घटना का संक्षिप्त विवरण दिया और अपनी कामयाबी के बारे में बताया। सुन कर सबने राहत की सांस ली। फिर हमने साथ में खाना खाया और अपने अपने कमरों में सोने चले गए। मैं दिनभर में सात लोगों से चुद चुद कर सबसे ज्यादा थकी हुई थी और ऊपर से सरदार की मरम्मत करने में अतिरिक्त ऊर्जा खर्च कर बैठी, अतः बिस्तर पर पड़ते ही गहरी निद्रा के आगोश में चली गई।

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Rajni4u

मैं एक 51 साल की विधवा शिक्षिका हूँ। मैं कामोत्तेजक कहानियां पढ़ना, दोस्ती करना और दोस्तों से किसी भी प्रकार की चैटिंग करना पसंद करती हूं। मेरी रुचि संगीत में भी है। फिलहाल मैं अपनी कामुक भावनाओं को कहानियों के माध्यम से लोगों के सम्मुख प्रस्तुत करने का प्रयास कर रही हूं।