संध्या ने ना ना कर के आखिर ले ही लिया

नमस्कार दोस्तो ये कहनी सुरु होती है मेरे पहिले जॉब से मै नयी सिटी मे मुंबई छोड के जॉब के लेये गया और वहा एक घर लिया रेंट पर और रहना शुरु किया था पहिला जॉब और respisbility जादा और तीन शिफ्ट ड्यूटी और बाजू मे मेस मे भोजन करना  और Saturday, Sunday मुंबई जाना ये जिंदगी थी

लेकीन इसी जिंदगी मे कोई हमे देखा देखी कर रहा था 16साल मे शाद्दी हुई और 03बच्चे की मम्मी हुई मेरी संध्या मैडम जो पडोस मे राह रही थी उमर 24लेकीन 32-28-32और मेरी उमर 26थी हमे जिस दिन पत्ता चला तभी गर्मी का महिना था और हम हमारी 1st शिफ्ट करके 3बजे घर आये तभी संध्या ने पीछे के दरवाजा को ठोका मै ने जाके दरवाजा खोला तभी उसका पल्लू दो बूब्स के बिच मे था और मुझे दोनो बूब्स और बडा गले का बौऊज होणे के कारण मेरी नजर उसके गोरे बदन पर से नाहि हटी और कुछ देर बाद आवज आई “हमरी पाणी की टंकी मे पाणी नाहि है काय मै दो बकेट पाणी ले लू” मैने मेरा सिर्फ सर हिलया और वो गयी मैने फिर मेरे कापडे निकले और टॉवेल लेके वॉश बाथरूम गया मेरे बदन पर सिर्फ अंडरवेअर था और मै फ्रेश हो रहा था लेकीन संध्या को देखने के कारण लंड खडा होगया था ! तभी पिछला दरवाजा खुलणे की आवज आई और बाथरूम का दरवाजा किसीने खोला और मैडम ने अंडरवेअर और खडे लंड के साथ दखलीया और हम दोनो एक दुसरे को देखते जा रहे और पिछला दरवाजा हवा के कारण बन्द हुआ और मै टॉवेल लागा के बाथरूम के बाहर आया और शार्ट पँट और  टी शर्ट पहनके T.V लागय और सोफा सेट पर बैठ गया रुम फुल फर्नीश था तो संध्या मैडम बकेट पाणी भरने को लागा के  किचन, बेडरूम ,और हॉल  रुम देख रही थी और फिर मेरे बाजू मे थोडा दुर आके बैठ गायी और हमारी बातचीत सुरु हो गयी. सवाल 1. आप अकेले हो तो इतना बडा रुम ? 2. आप कहा से हो?. 3. कहा जॉब करते हो? मैने जवाब दिये और बकेट भर गयी और मै जल्द बाजी मे उठा नळ बंध करने और संध्या भी उठी और एकदम से हम दोनो को एक दुसरे का बदन से बदन टच होगये और मै ने सॉरी बोला और मैडम बकेट ले के गयी और फिर आगयी और मै उधर ही खडा था और संध्या का वो कोमल टच के बरे मे सोचते. और मेरा लंड फिर से खडा हो गया संध्या को देखने के बाद मै कसे भी कण्ट्रोल करके वापस सोफे पर बैठ गया . और ईस बार संध्या मैडम ने बकेट नळ के निचे पाणी भरने नाहि लगयी बल्की नळ तो बंध था सिर्फ बकेट बाथरूम मे रखा कर मेरे साथ सोफे पर बैठ गयी. और बोली आप  को किसी से दोस्ती करने नाहि आती मै बोला  आप का ये सवाल मेरे समज मे नाहि आया ? मै आप को एक हफ्ते से देख रही हू और स्माइल कर रही हू लेकीन आप ने एक बार भी मेरी नजर से नजर नाहि मिलयी मै मेरे मन मे बोल रहा था ! मेरी नजर तो तेरी फिगर पे रहती थी और डर रहा था …….!  फिर मै बोला की जॉब के टेंशन मे कुछ टाईम नाहि मिला .और फिर संध्या बोली थोडा आजू बाजू देखना जरुरी है ! फिर मैने बोला सॉरी मैडम तुरंत  बोली मेरा नाम संध्या है मुझे सिर्फ मेरे नाम से बोलो मै ने कहा ओके फिर शुरु हुआ टी , खाणा,चिकन,कभी स्वीट डिश आने लगी संध्या ने अपने पती से मेरी पहचाण कुछ ईस तरह से करके दी की मै उसकी मामा का लाडका हू जो मुंबई मे राहते है और  मामा कभी फैमिली मे मिक्स नाहि होते और सही मे संध्या का मामा मुंबई मे ही था !

मुझे ये बात हर दम सताती रही की why she introducing like that? ओके और बरिश शुरु हो गयी और एक दिन संध्या बोली आप मेरे घर खाणा खाया करो मेरे मन मे तो वासना बड चुकी थी reason इतने महिने मे मुझे उसका टच उसको मेरा टच हो के मेरी कमुक्ता तो बड गयी थी कभी सपने मे आती और नाइट फौल्ट हो जाता था ! फिर एक दिन अचानक उनके घर से रात को  रोने की आवज आइयी मै जाके देखा तो उनके पती के गाव मे डैथ हो गयी थी और उनको गाव जाना था और तभी मैने पुच्छ लिया कोई प्रॉब्लम है जाने के लिये तो मुझे घर के अन्दार बुलाया संध्या ने और बोली पैसे का प्रॉब्लम है और मुझे नाहि जाना है ! मै भी तो याही समय देख रहा था मैने तुरंत ATM से पैसे निकले और आ गया जाने के पहिले संध्या के पती को बोला आप लोग पैकिंग करो पैसे मै देता हू! जैसे मै आया एक  बैग रेडी था मै ने 5000रु संध्या के पती के हात मे दिये तभी वो रोने लागा और बोला इन्का ध्यान रखना फिर रिक्षा मे बिठा दिया और मै घर आया तभी संध्या दरवाजा मे बैठ कर मेरा इन्तज़ार कर रही थी! फिर मै मेरे घर का दरवाजा खोलने लागा तभी मैने आवज सुनी मेरे नाम से कोई मुझे बुला रहा है पीछे मूड के देखा तो संध्या मुझे आवज दे रही थी  मै येही सुनने के लिये बेताब था ! फिर मै उसके दरवाजा मे गया तो संध्या ने मुझे घर के अंदर बुलाया और बोली बैठो मै बैठ गया और बात करते रहे उसने उसके और सास के रिलेशन के बारे मे बोला और फिर अपने पती के बारे मे और रिलेशन के बरे मे बोलने लगी ” 01बच्चे के होणे तक तो मै बहुत उमर मे छोटी थी sex के बरे मे कुछ नाहि मालुम था और गाव की गोरी कुवरी मुझे तो पहिली बार इतना दर्द दिया और खून निकाला मै दो दिन तक रुम से बाहर नाहि आयी और चालणे भी नाहि आया फिर भी रोज रात मेरा पती रोज दर्द देता था मै जोर से चिल्लती थी फिर वो मुझे मर कर चुप करता था फिर 05दिन बाद मुझे मेरे मम्मी के घर भेजा और मेरा पती जॉब के लिये पुणे गया और वहा घर लेके मुझे लेने आने वाला था और मै बहोत डर गयी थी लेकीन मेरा पती 15दिन के बाद आया फिर मुझे उनका ये सब करना अच्छा लागणे लागा लेकीन दर्द बहोत होता था अभी 03बच्चे के बाद और आज तक सिर्फ एक या दो महिने मे सिर्फ साडी उठाके लंड अंदर डालो और झड जाओ सिर्फ अपने सुख के बारे मे सोचथा है! ये बात करते मै बैठे बैठे सो गया और जब नींद खुली तो उनके ही बैड रुम मे हम जहा बात कर रहे थे उधर मै बैड पे सोया हू और संध्या भी मेरे बाजू मे क्रॉस मे सो गयी है और 03बच्चे निचे सो ये है और उसकी सारी और ब्लाऊज कुछ नजरा ऐसा था बूब्स दो बटन खुले थे और पल्लू बाजू मे था मानो मेरे लिये खुली दावत थी चुसने के लिये. फिर मै ने लाईट बन्द करके बैड पर संध्या को अपने हात से टच करने लागा तो संध्या की नींद खुल गयी और फिर मै बोला मै घर जा रहा था तो बैड के दिवार के बाजू मे सो गयी और बोली सो जाओ ना मुझे अकेले डर लगता है मै बहुत खुश हो गया जैसे आज मेरी सुहाग रात होगी फिर मै वॉश रुम गया और अंडरवेअर और टी शर्ट निकाला और संध्या के बाजू मे सो गया . और लंड की हलचल शुरु हो गयी और मै थोडा संध्या के करिब गया जैसे मै करिब गया तो नींद मे मेरी तरफ संध्या ने अपने आप को घुमा दिया और मेरे लंड ने तो 90डिग्री खडा होणे के कारण मेरी शार्ट के चैन मे टच हो रहा था फिर मैने चैन खोली और उसे बाहर निकाला और संध्या के नज्दीक गया और नरे लंड को संध्या के सारी टच होणे का पत्ता चल रहा था. फिर कण्ट्रोल ना होणे के कारण मैने मेरा हात संध्या के खुले पेट के उप्पर हात रखा और जैसे मेरा हात लागा संध्या ने सिस्करी भरी आहा ऊ जैसे मुझे support कर रही थी. फिर मै ने मेरा कण्ट्रोल छोड दिया और करिब गया तभी मेरा लंड संध्या की दोनो जघा मे टच हो गया और कोई respond नाहि हुआ तो मैने मेरे हात बूब्स पे राखे तभी और एक सिस्करी आयी उ और फिर अपने पिठ के बल सिधे सो गयी मानो संध्या बूब्स पुम्पींग करने बोल रही है फिर मैने संध्या के चेहरे को देखा तो वो सोयी है और फिर मैने ब्लाऊज के बटन खोले तो भी कोई हरकत नाहि फिर मै समज गया की संध्या जान बुज के ऐसे रिएक्शन दे रही है लेकीन वो भी आनंद लेने चाह है फिर मै सिधे बिना सोचे संध्या के निप्प्ल चुसने लागा और एक हात से दुसरे बूब्स को दबा ने लागा तभी संध्या का एक हात मेरे लंड को सहला रहा था और दुसरा हात मेरे सर के बलो  मे घुम रहा था लेकीन संध्या के मुह मे पती का नाम और आखे बन्द थी मै समज नाहि पा रहा था संध्या सो यी है या नाटक कर रही है फिर मेरा दिमाग घुम गया और सिधे उसकी सारी उपर की और लंड को उसकी चुत मे पेंटी के उपर रख कर जोर लागय तो अचानक आखे खुल गयी और बोलने लगी की तुझे जो कुछ करना है तो उपर कर मै हात और मुह से तेरे पाणी निकलू गी  निचे सिर्फ मेरे पती की जगह है मै उनके साथ धोका नाहि कर सकती. मुझे तो सिर्फ जनना था की मैडम सोयी है या जग रही है और मैडम को कैसे तैयार करना है और कैसे चुदवना है ये तो मेरे हात मे है.

फिर सुरु हो गया फोर प्ले पहले तो मैडम ने मेरी शार्ट निकली और खडे लंड को देख के बोली ये अंदर गया तो मै तो मर जाये गी फिर लंड को चुमने चाटने लगी और जोर जोर से पुरा लंड मुह लेने लगी और फिर दोनो बूब्स के बिच मे लंड  लेकर बूब्स मे लंड को झड ने की बहुत कोशिश की लेकीन नाहि फिर मैने बोला रुक जाओ मुझे सुसू जाना है तुम कपडा निकलो और चादर ले के सो जा मै आया .और मै वॉशरुम गया और मूठ मर के मेरा पानी झड दिय और हात धोके आ गया थोडा आराम हो गया reason  फिर भी संध्या को चौदने का था!  जैसे मै बाहर आया तो संध्या अपनी सारी, ब्लाऊज निकल के सोयी थी ! फिर मै भी नगे बदन चादर मे घुस ग या तो फिर दोनो नगे बदन एक दुसरे को चिपक गये और लंड फिर से खडा हो गया और उसके बाद जो भी हुआ वो आप सोच भी नाहि सकते मैने संध्या को इतना मजबुर किया फोर प्ले मे मैने संध्या को सर के बलो से निचे तक जीभ से चाटने लगा फिर उसके मुह से आह अह औच तू मेरा लव है मेरे पती ने भी इतना कभी किया नाहि फिर मैने उसके निप्पल को मसलणा और चुसना शुरु किया और जैसे मै उसके चुतको टच करता वो हात निकल देती फिर मैने उसके नाभी मे जीभसे चटना शुरु किया और फिर निचे गया और धिरे धिरे संध्या की पँटी निचे करना शुरु किया फिर वो कुछ नाहि बोली और मैने उसकी पँटी निकली तो सामने नागि चुत थी मैने उसके मुह मे मेरा लंड दिया 69पोज़ीशन मे और 02ऊगली चुतमे अंदर बाहर करने लगा और नभी और चुतके उपर चाट रहा था और संध्या भी मूड मे मेरा लंड चुस रही थी फिर मैने देखा की संध्या भी उचल उचल कर मेरे फिंगरींग का मज्जा रही थी और बोल रही थी और अंदर डालो मेरा निकल रहा है और मैने तरत मेरी फिंगर निकली और उसके दोनो पैरो के बिच मे बैठा वैसे संध्या ने अपने पैर फै लाये और उपर लिये और बोलने लगी अभी अंदर डालो और मेरी चुत को फाड दो फिर भी मैने नाहि डाला तो मैडम ने मुझे धक्का दिया और बोली मेहरबनी करके निचे सो जाओ मै सो गया मैडम ने लंड को मुह मे लिया और फिर उसको अपने हात से अपनी चुत मे डाल के उस पर बैठ गयी और जोर जोर से उत्थक बैठक कर ने लगी जब तक दो तीन बार झड गयी और बोली अभी तू मेरी गान्ड इतनी जोर से मार की मै पागल हो जाऊ फिर मैने मेरा लंड उसकी गान्ड़ डाला और जोर जोर से धक्का देने लगा वो नेचे चिल्ला रही है और मै खुब आनंद ले रहा था कारण अगर पहले ही सती सावित्री नाहि बनती तो ये नाहि होता फिर करिब 20min चौदने के बाद मुझे लगा मै अभी झड ने वाला हू तो उसके लिप्स को हार्ड किस कर ने लगा तभी संध्या ने भी अपने दोनो पैरो से मेरी कम्ब्बर को ऐसा कैची मारी के मै और संध्या दोनो तरफ से एक दुसरे को चोद रहे है और ऐसी पचा पच आवज से दोनो और उत्तेजित हो रहे थे और दोनो एक ही साथ झड गये आप को जिस दिन एक साथ मे झड ने का अगर experience होगा तो आप को समज मे आये गा फिर रात एक घंटा हम वैसे ही चिपक के सो गये और फिर बाथरूम मे वॉश किया और बाथ रुम मे भी खडे खडे एक गेम किया और बाहर आये और फिर बाहर आये और देखा तो 2.45pm बजे थे फिर मैने बोला जानु हम बाहर सोते है और वो भी नगे वो मान गयी और नीड़ लगी और नीड़ खुली तो morning के 7.30am बजे थे फिर मैने संध्या किस करके उठाया और वो भी शुरु हो गयी हमने और एक गेम किया फिर संध्या का पती आने तक मै ही उसका पती था सिर्फ चौदने वाला और जब तक मै पुणे मे था वो पती से कोणड़म लगा के चुदवती थी और मेरे से ऐसे ही और बोल टी थी कोई अपने से कोणड़म लगाके नाहि करता इसका भगतान करना पडा वो भी हॉस्पिटल मे मुझे पैसे से और संध्या को ….. से आज भी जब पुणे जाता हू तो असी के घर मे रहता हू

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